हिमाचल के गरीब मरीजों के लिए चलाई सहारा योजना में बड़ा बदलाव

हिमाचल सरकार ने गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को आर्थिक सहायता देने वाली सहारा योजना में बड़ा बदलाव किया है। योजना को स्वास्थ्य विभाग से लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को दे दिया है।

यद्द फैसला शायद इसलिए भी लिया गया हो, क्योंकि सहारा के कुल 38 हजार आवेदनों में विकलांगता से संबंधित 12 हजार से अधिक आवेदन थे। इन्हें पहले ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग देखता है।

इसलिए पेंशन की डुप्लीकेसी को रोकने के लिए भी यह कदम लिया गया हो। अब भविष्य में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ईसोम्सा विंग के माध्यम से इस पेंशन को रेगुलेट करेगा।

हालांकि पिछले लंबे समय से इस धनराशि के न मिलने की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। पिछले बजट सत्र में मार्च के महीने में विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी सहारा योजना पर स्थिति स्पष्ट की थी।

उन्होंने कहा था कि पिछली भाजपा सरकार के मुकाबले कांग्रेस सरकार ने इस योजना में ज्यादा खर्च किया है। मुख्यमंत्री ने बताया था कि सहारा योजना के तहत वर्तमान में 37,819 लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं, जिसमें 15,774 नए लाभार्थी जोड़े गए हैं।

इस योजना पर राज्य सरकार ने कुल 202 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि पिछली सरकार के कार्यकाल में इस पर 140 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि विभाग ने सहारा योजना की जांच शुरू की है।

यह जांच इसलिए की जा रही है, क्योंकि करीब 38 हजार लाभार्थियों में से सरकार को आशंका है कि 2,000 ऐसे लोग भी इसका फायदा ले रहे हैं, जो पहले से ही सामाजिक सुरक्षा या अन्य विभागों से पेंशन ले रहे हैं।

इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए मुख्यमंत्री ने सहारा योजना के लाभार्थियों को हिम परिवार पोर्टल से जोडऩे के निर्देश दिए थे। इससे डिजिटल डाटा का मिलान किया जा रहा है। इसी डाटा वेरिफिकेशन में सामाजिक सुरक्षा पेंशन में भी फर्जीवाड़ा मिल चुका है।

सहारा गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, पार्किंसंस, लकवा और थैलेसीमिया आदि से जूझ रहे मरीजों को 3,000 रुपए प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पूर्व भाजपा सरकार ने ये याजना लाई थी, जिसे वर्तमान सरकार ने भी जारी रखा है।

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