हिमाचल की शौर्य गाथा: राष्ट्रपति भवन में शहीद कुलभूषण की वीरता ने गर्व से चौड़ा कर दिया सीना

हिमाचल के जिला शिमला व सिरमौर के साथ सटे कुपवी क्षेत्र के एक और वीर सपूत को देश की सेवा में खो दिया था। राइफलमैन कुलभूषण मांटा, जिनकी बहादुरी और साहस की कहानी सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।

कुलभूषण मांटा मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित

यह सम्मान उनकी मां दुर्मा देवी और धर्मपत्नी नीतू कुमारी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में ग्रहण किया।

राष्ट्रपति भवन में जब कुलभूषण मांटा की वीरता की गाथा बयां की जा रही थी, तो उनकी मां दुर्मा देवी की आंखों में गर्व और आंसू दोनों की छवि साफ नजर आ रही थी।

उनके चेहरे की दृढ़ता ने हर एक को यह महसूस कराया कि कुलभूषण की वीरता उनकी रगों में बसी है। धर्मपत्नी नीतू कुमारी ने भी अपनी हिम्मत और संकल्प को बरकरार रखते हुए वीर बलिदानी की अर्धांगिनी होने का परिचय दिया।

कुलभूषण मांटा 52 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान थे। वह वर्ष 2014 में सेना में भर्ती हुए थे। अक्तूबर 2022 में बारामूला में एक ऑप्रेशन के दौरान अतंकियों से मुठभेड़ के दौरान राइफलमैन कुलभूषण मांटा ने गोली लगने के बावजूद एक आतंकी को जिंदा पकड़ा था।

27 अक्तूबर को वह शहीद हो गए थे। कुलभूषण मांटा एक बहादुर और प्रतिबद्ध सैनिक थे, जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए 26 वर्ष की आयु में अपने प्राणों की आहुति दे दी।

कुलभूषण मांटा उनकी सराहनीय बहादुरी, कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए 15 अगस्त, 2023 को (मरणोपरांत) वीरता पुरस्कार और अब शौर्य चक्र से नवाजा गया।

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