सामरिक सुरक्षा कवच बनेगी कांगड़ा घाटी की रेल

हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली लगभग 200 किलोमीटर लंबी पठानकोट-जोगिन्दरनगर रेलवे लाइन का ब्रॉडगेज यानी बड़ी लाइन में बदलना केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि यह देश की सीमाओं की सुरक्षा और राज्य की आर्थिकी की तकदीर बदलने वाला कदम साबित होगा।

सामरिक महत्व

लगभग एक सदी पुराने नैरोगेज यानि छोटी लाइन के इतिहास को पीछे छोड़ते हुए जब यह कॉरिडोर बड़ी लाइन में तब्दील होगा, तो भारतीय सेना के लिए लेह-लद्दाख और उत्तर-पूर्वी अग्रिम क्षेत्रों तक रसद, भारी सैन्य साजोसामान और टैंकों को सुरक्षित व त्वरित गति से पहुंचाने के लिए एक मजबूत और वैकल्पिक सामरिक मार्ग तैयार हो जाएगा।

अभी सीमित है गति

वर्तमान में नैरोगेज होने के कारण ट्रेनों की गति बेहद सीमित है और भारी माल ढुलाई पूरी तरह असंभव है, लेकिन ब्रॉडगेज बनते ही यह पूरी घाटी देश के सैन्य और रणनीतिक नक्शे पर एक नए सुरक्षा कवच के रूप में उभरकर सामने आएगी।

इस परियोजना के धरातल पर उतरने से हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग में एक ऐसा अभूतपूर्व उछाल आने की उम्मीद है, जिसकी कल्पना दशकों से की जा रही थी।

ब्रॉडगेज लाइन बिछने के बाद देश के बड़े महानगरों से सीधे एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें कांगड़ा घाटी के प्रवेश द्वार तक पहुंच सकेंगी।

बढ़ेगी पर्यटकों की आमद

इससे धर्मशाला, मकलोडगंज और पालमपुर जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्रों की दूरी न केवल सिमट जाएगी, बल्कि सालाना यहां आने वाले लाखों सैलानियों की संख्या दोगुनी होने की राह भी आसान होगी।

कांगड़ा घाटी में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठों मां चामुंडा देवी, मां बज्रेश्वरी देवी और मां ज्वालामुखी जैसे पावन धामों में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शीश नवाजने आते हैं।

सुगम होगी यात्रा

बड़ी रेल लाइन बनने से बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए इन धार्मिक स्थलों की यात्रा बेहद सुगम, सस्ती और आरामदायक हो जाएगी। वहीं यह ब्रॉडगेज लाइन कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर जिलों के स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी।

फील्ड में उतरी सर्वे टीमें तैयार कर रही डाटा

रेलवे और जिला प्रशासन ने कहा है कि ग्राउंड पर उतरीं सर्वे टीमें पिछले एक साल के ईंधन की खपत, टोल प्लाजा के वाहनों के पैटर्न और बस डिपो के यात्री डाटा को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र कर रही हैं।

यह डाटा जितना सटीक होगा, इस ऐतिहासिक रेल परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर उतनी ही मजबूत बनेगी। रेलवे ने सभी हितधारकों से आग्रह किया है कि वे टीमों को सही और प्रामाणिक डाटा उपलब्ध करवाकर सहयोग करें।

होम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *