पद्धर से बिजणी तक रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ 19 किमी लंबा फोरलेन
देवभूमि हिमाचल में ढांचागत विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शुमार पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना का पद्धर-बिजणी खंड पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है।
545 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित
अब इस एरिया में ट्रैफिक जाम नहीं लगेगा। करीब 545 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस 19 किलोमीटर लंबे मार्ग पर अब गाड़ियां सरपट दौड़ने को बेताब हैं।
इस आधुनिक मार्ग के शुरू होने की खबर से न केवल स्थानीय जनता बल्कि इस रूट पर सफर करने वाले हजारों पर्यटकों और वाहन चालकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है।
तय समय से 5 महीने पहले काम पूरा
इस परियोजना ने समयबद्धता और कार्यकुशलता की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। देश में जहां बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अक्सर देरी का शिकार हो जाती हैं, वहीं इस फोरलेन खंड का निर्माण कार्य तय समय-सीमा से पांच महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है।
निर्माण कार्य अवधि नवंबर 2026 तय
20 जुलाई 2022 को इस प्रोजेक्ट का टेंडर अवार्ड हुआ था और चार नवंबर 2024 को काम शुरू होने के बाद, निर्माण एजेंसी ने दिन-रात मेहनत कर इसे समय से पहले पूरा कर दिखाया है। निर्माण कार्य पूरा करने की अवधि नवंबर 2026 तय की गई थी।
25 मिनट में तय होगा सफर
अब पद्धर से बिजणी के बीच सफर करने वाले लोगों को पुराने, संकरे और घुमावदार रास्तों के ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। नए मार्ग की चौड़ाई 12 मीटर है, जिससे वाहनों की आवाजाही बेहद सुगम और सुरक्षित हो जाएगी।
इसके परिणामस्वरूप, जो सफर पहले 30 से 40 मिनट में पूरा होता था। अब मात्र 20 से 25 मिनट में आनंददायक तरीके से पूरा हो जाएगा। इससे न केवल जनता के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि देश के ईंधन की भी भारी बचत होगी।
पौने चार किलोमीटर कम हुई दूरी
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस नए अलाइनमेंट से दोनों कस्बों के बीच की दूरी करीब पौने चार किलोमीटर कम हो गई है। पुराने मार्ग की लंबाई 22.815 किलोमीटर थी।
24 छोटे-बड़े पुल
पहाड़ी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, इस 19 किलोमीटर के पैच में 24 छोटे-बड़े पुलों का बेहतरीन निर्माण किया गया है। इसमें पांच बड़े पुल हैं। यह पुल न सिर्फ यात्रा को सुगम बनाएंगे, बल्कि बरसात के मौसम में भी मार्ग को निर्बाध और सुरक्षित रखेंगे।
सेना सहित पर्यटकों के लिए उपयोगी
यह मार्ग सेना के वाहनों की सुगम आवाजाही के लिए सामरिक रूप से जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही यह कांगड़ा और मंडी घाटी के पर्यटन उद्योग के लिए संजीवनी साबित होगा। मार्ग पर वाहनों को हरी झंडी देने से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वीरवार को इस पूरे खंड का व्यापक सुरक्षा परीक्षण (सेफ्टी ट्रायल) किया जाएगा।
क्या कहते हैं परियोजना निदेशक
सुरक्षा मानकों पर अंतिम मुहर लगते ही इस मार्ग को जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। इस मार्ग के शुरू होने से क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खुलना तय है।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ मंडी।





