प्रदेश की 135 पेयजल और सिंचाई योजनाएं होंगी सौर ऊर्जा से संचालित
हिमाचल प्रदेश में पेयजल और सिंचाई योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने की सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत जल शक्ति विभाग की 135 पेयजल और सिंचाई योजनाओं को बिजली की आपूर्ति सोलर पैनल से करने की योजना है।
इससे विभाग पर बढ़ रहे बिजली के खर्च को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की योजनाओं को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में जल शक्ति विभाग की दस हजार से अधिक पानी की स्कीमें है। जबकि सिंचाई योजनाओं का आंकड़ा पांच हजार के आसपास है।
विभाग की अधिकांश योजनाओं को संचालित करने के लिए पंपिंग, मोटर और अन्य उपकरणों को लगातार बिजली की जरूरत रहती है। बिजली की दरों और खपत बढऩे के कारण विभाग को हर साल करीब 800 करोड़ रुपए का बिजली बिल चुकाना पड़ता है।
अब इसी खर्च को कम करने के लिए योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोडऩे पर काम किया जा रहा है। पता चला है कि योजना के तहत पहले चरण में 135 पेयजल और सिंचाई योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी है।
इन योजनाओं में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिनसे पंपिंग और पानी की आपूर्ति के लिए आवश्यक बिजली तैयार की जाएगी।
पहले चरण में चयनित योजनाओं के परिणाम और मॉडल की सफलता का आकलन करने के बाद इसे प्रदेश की अन्य योजनाओं में भी लागू किया जा सकता है।
इस व्यवस्था से जिन योजनाओं में हर महीने बड़ी मात्रा में बिजली की खपत होती है, वहां बिजली के बिल में सीधे कमी आने की उम्मीद है। सौर पैनल के साथ योजनाओं को जोडऩे से बिजली पर निर्भरता कम होगी और विभाग को लंबे समय में बड़ी आर्थिक बचत हो सकती है।
बताया जा रहा है कि चिन्हित योजनाओं पर प्रोजेक्ट के आधार पर निजी कंपनियों को सोलर प्लांट विकसित करने का जिम्मा सौंपने की भी योजना भी है।
बहरहाल पेयजल और सिंचाई स्कीमों को सौर ऊर्जा से जोडऩे की सरकार की योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक योजनाओं इसके साथ जोडऩे की दिशा में आगे बढ़ेगी।
जाहिर है कि पेयजल और सिंचाई योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोडऩे से आर्थिक बोझ कम होने के साथ-साथ स्कीमों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का विकल्प मिलेगा।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां बिजली की उपलब्धता या आपूर्ति में परेशानी रहती है, वहां भी सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।








