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बूढ़ी दिवाली पर लोगों ने निभाई पुरानी परंपरा

सराज विधानसभा क्षेत्र के चेत गांव बूढ़ी दिवाली पर मशालें जलाकर व अश्लील जुमलों से भूत-पिशाच भगाए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर हारियानों ने नृत्य किया और पुरानी परंपरा का निर्वहन किया।

बूढी दिवाली उत्सव

बूढ़ी दिवाली में गांवों के लोगों के बीच लड़ाई भी होती है। गांवों के लोग मशालों से एक-दूसरे पर वार करते हैं। इस दौरान नियम का पालन करना जरूरी होता है, अन्यथा व्यक्ति को दंडित किया जाता है।

ऐसा दावा है कि इस लड़ाई में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आती है और न ही किसी व्यक्ति के कपड़े जलते हैं। इस दौरान देवता की शक्तियां साथ होती हैं। वहीं सदियों से चलती आ रही इस परंपरा में हर वर्ष यह बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है।

जिसमें यह एक वर्ष गांव डाहर में और एक वर्ष गांव चेत मनाई जाती है। इस बार भी मंगलवार रात को बूढ़ी दिवाली धूमधाम के साथ मनाई गई।

इस अवसर पर गांव के कीर्त राम, लुदरमणी, वीर सिंह, नरेंद्र कुमार, घनश्याम सिंह, गोपाल सिंह, लाल सिंह, कश्मीर सिंह आदि ने मशालें जलाकर इस परंपरा को निभाया।

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