इस मंदिर से है गुरु गोबिंद सिंह जी का खास संबंध

बिलासपुर: 350वें प्रकाशोत्सव पर हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी के खास संबंध हैं। इसके चलते सिख इसमें अटूट आस्था रखते हैं। हम बात कर रहे हैं देश में मौजूद 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माता नैना देवी मंदिर की। यह पंजाब-हिमाचल बार्डर पर स्थित हिन्दू-सिखों का सांझा तीर्थ स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में 60 फीसदी सिख होते हैं। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने माता नैना देवी के मंदिर में तपस्या की थी और एक साल से अधिक समय तक मंदिर के हवन कुंड में हवन किया था।

तपस्या से प्रसन्न होकर मां भवानी ने गुरु जी को भेंट की थी तलवार
मान्यता है कि तपस्या व हवन से प्रसन्न होकर मां भवानी ने खुद यहां गुरु जी को प्रसाद के रूप में तलवार भेंट की। मां भवानी ने गुरू जी को वरदान दिया था कि तुम्हारी विजय होगी और इस धरती पर तुम्हारा पंथ सदैव चलता रहेगा। हवन आदि के बाद जब गुरू जी आनंदपुर साहब की ओर जाने लगे तो उन्होंने अपने तीर की नोक से तांबे की एक प्लेट पर अपने पुरोहित को हुक्मनामा लिखकर दिया, जो आज भी नैना देवी के पंडित बांके बिहारी शर्मा के पास सुरक्षित है। खास बात यह है कि अगस्त 2008 में नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के जूते, चप्पल और अन्य सामान बिखरे पड़े होने के बावजूद भक्तों का आना लगातार जारी था।

52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है यह स्थान
नैना देवी के अवतार के बारे में पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान विश्व के कुल 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां मां सती के नयन इसी स्थान पर गिरे थे, इसलिए इस स्थान का नाम नैना देवी पड़ा है। कई पौराणिक कहानियां श्री नैना देवी मंदिर की स्थापना के साथ जुडी हुई हैं। बताया जाता है कि देवी सती ने खुद को यज्ञ में जिंदा जला दिया था, जिससे भगवान शिव पीड़ित हो गए। उन्होंने सती को कंधे पर उठाया और तांडव नाच शुरू कर दिया। इसने स्वर्ग में सभी देवताओं को डरा दिया कि भगवान शिव का यह रूप प्रलय ला सकता है। भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि अपने चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दें। श्री नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरीं।

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