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लेह के लिए बन रहा तीसरा सड़क मार्ग जो हर मौसम में खुला रहेगा

सुबह सूरज अभी निकला ही था कि तापमान -35 डिग्री सेल्सियस, सांसें जम रही थीं, पर फावड़े और खुदाई मशीनें चल रही थीं।

लेह के लिए तैयार हो रहा तीसरा सड़क मार्ग

चिलिंग से नीराक और आगे पदम तक बर्फ से ढकी जमीन से 16000 हजार फुट की ऊंचाई पर बीआरओ के जवान व मजदूर एक और राह तलाशते हुए यानी मार्ग बनाते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं।

मजदूरों की मानें, तो वे ठंड नहीं देखते, बस मीटर गिनते हैं कि कितना रास्ता बन पाया है। हम बात कर रहे हैं कि 298 किलोमीटर लंबे निम्मो-पदम-दारचा-लेह रोड की। इसका कार्य तेजी से चला हुआ है।

यहां सड़क बनते ही शिकुंला दर्रा रोड ऑल वैदर रोड कहलाएगा। इस सड़क में से कई सेक्शन 80 डिग्री की चढ़ाई पर हैं, तो कई जांस्कर नदी के बिलकुल किनारे पर।

ऐसे में कभी मशीनें काम बंद कर देती हैं, तो कभी हाथ। फिर भी मजदूर और बीआरओ यहां रुकते नहीं हैं, बल्कि आगे बढ़ते हुए राह बनाते जा रहे हैं।

लेह जाने के लिए यह सडक़ वर्ष 2026 तक तैयार होगी। साथ ही शिंकुला टनल बनने के बाद ही यह ऑल वैदर रोड कहलाएगी। इसके बाद यह सडक़ हर मौसम में खुली रहेगी।

हालांकि अभी जितना पैच तैयार हुआ है, उससे सैलानियों व स्थानीय लोगों को सप्ताह में दो दिन बुधवार व रविवार को वाहनों को यहां से छोड़ा जाता है।

कम समय में यह नया मार्ग मौजूदा दो रास्तों श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाइवे के मुकाबले एक तीसरा विकल्प होगा। बता दें कि ऑल वैदर रोड पर सरकार की ओर से 3200 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

भविष्य में देश को मिलने वाले पांच बड़े फायदेसुरक्षा में मजबूती, चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर सेना को त्वरित पहुंच व सप्लाई मिलेगी। कठिन मौसम में रसद पहुंचाना आसान होगा।

पर्यटन को बढ़ावा

जांस्कर और पदम जैसे क्षेत्रों तक अब सैलानी आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे स्थानीय पर्यटन और रोजगार में बड़ा उछाल आएगा। शिंकुला टनल बनने के बाद यह मार्ग सालभर न केवल खुला रहेगा, बल्कि लोग भी आसानी से लेह तक पहुंच पाने में राहत महसूस करेंगे।

स्थानीय विकास

लद्दाख और जांस्कर क्षेत्र में अब दवां, राशन, निर्माण सामग्री और अन्य सेवाएं समय पर पहुंच सकेंगी। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुधरेंगी। इसके साथ ही इस मार्ग से हिमाचल, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बीच व्यापार और आपसी संपर्क कई गुना तेज़ होगा।

टनल का निर्माण

यहां 13.5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण जारी है। इसके बनते ही यह रोड हर मौसम में खुला रहेगा। वहीं, यात्रा समय में 4.5 घंटे की कटौती होगी।

यात्रा का नया अनुभव

मनाली से लेह अब 14.16 घंटे की बजाय 10 से 11 घंटे में पूरा होगा। बर्फबारी में भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में निर्भरता इस पर अधिक होगी।

निम्मो-पदम-दारचा रोड लद्दाख सहित भारत के शेष हिस्सों से जोड़ेगा। यह भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास की दृष्टि से एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा।

ऐसे हुई इस मार्ग की खोज

लामा छोंजोर की पहल से आज यह सड़क बनने जा रही है। उन्होंने इस रोड़ की नींव रखी थी। लेह से मनाली आने के लिए करीब लगभग एक सप्ताह लग जाता था।

बीमार होने पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता। ऐसे में उन्होंने शिंकुला से करजाक गांव तक सडक़ बनाने की ठान ली। जो काम सरकार नहीं कर सकी थी, सड़क तलाशने का वह काम लामा कर गए। उन्होंने सड़क के लिए अपनी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई खर्च कर डाली।

पहाड़ काटने के लिए अपना घर व जमीन तक बेच डाली। मशीनें खरीदीं, रोड़ बनने पर करीब 30 से अधिक गांवों को कनेक्टिविटी मिल गई। वर्ष 2021 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लामा छोंजोर पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।

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