जोगिन्दरनगर में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएँ

जोगिन्दरनगर : जहाँ सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देने का दम भरती है वहीँ लगता है जोगिन्दरनगर में सरकार की घोषणाएं दम तोड़ने लगी हैं. इतने बड़े विधानसभा क्षेत्र में जहाँ इतना बड़ा नागरिक अस्पताल आजकल डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है वहीँ स्थानीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी खुद बीमार है. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते विधानसभा क्षेत्र के हजारों मरीजों को आजकल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

स्वास्थ्य मंत्री ने किया था निरीक्षण

यह हैरानी की बात है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद भी उपमंडलीय चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाएँ दुरुस्त नहीं हो पाई हैं. अस्पताल में चल रहे रिक्त पदों के कारण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं.यहाँ पर मरीजो का चेकअप तो किया जा रहा है लेकिन गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है.

रात्रि में मरीजों को नहीं किया जा रहा दाखिल

इसका कारण अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी बताया जा रहा है. करीब दस दिन पहले ही स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था. जानकारी के अनुसार अस्पताल में चार माह से मरीजों के रात्रिकालीन दाखिले बंद कर दिए गए हैं.

नर्सिंग स्टाफ की है कमी

24 अप्रैल 2012 को पुर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने आयुर्वेदिक चिकित्सालय के नये भवन का शिलान्यास किया था. करेब तीन वर्ष बाद भवन तैयार भी हो गया. हालांकि अस्पताल में दो चिकित्सक और दो स्टाफ नर्सें तैनात की गई है लेकिन अस्पताल प्रबंधन का तर्क है की नर्सिंग और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों के कारण रात्रिकालीन मरीजों के दाखिले बंद करने पड़े हैं. अस्पताल में चौकीदार और सुरक्षाकर्मी के पद भी रिक्त हैं.

महज़ निभाई जा रही औपचारिकता

बहरहाल अस्पताल महज मरीजों की नब्ज़ टटोलने और दवाएं देने तक ही सीमित होकर रह गया है.गंभीर मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का अधिक लाभ नहीं मिल पा रहा है.

क्या कहते हैं विधायक

उधर स्थानीय विधायक प्रकाश राणा का कहना है कि अस्पताल की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में अवगत करवाया गया है. स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत करके समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा.

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