सीमेंट न होने से द्रंग की 40 पंचायतों में लटके करोड़ों के विकास कार्य

जोगिन्दरनगर  : विकास खंड द्रंग की चालीस पंचायतों में मनरेगा के तहत चले करोड़ों के विकास कार्य अधर में लटके पड़े हैं। पंचायतों को सरकारी सीमेंट की सप्लाई समय पर न हो पाना इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। विकास खंड की कोई भी पंचायत ऐसी नहीं, जिसमें मनरेगा के कार्य न चले हों। मनरेगा के तहत विकास खंड विभाग ने विकास कार्यों के प्रारूप को फाइनांशियल मंजूरी भी दे दी है। एक ओर सरकार और विभाग 31 मार्च को बजट के लैप्स होने की चेतावनी जन प्रतिनिधियों को दे रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था के चरमराए ढांचे को लेकर कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इस मामले पर विद्या देवी बीडीओ पद्धर का कहना है कि मांग के अनुसार सिमेंट पूरा नहीं आ रहा है।

बजट लैप्स की मिली चेतावनी

एक ओर सरकार और विभाग 31 मार्च को बजट के लैप्स होने की चेतावनी जन प्रतिनिधियों को दे रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था के चरमराए ढांचे को लेकर कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। विकास खंड की प्रत्येक पंचायत में मनरेगा के तहत लाखों के विकास कार्य चले हुए हैं। जिन कार्यों को फाइलांशियल मंजूरी मिल गई है और मनरेगा के तहत रोजगार के मस्टरोल जारी हो चुके हैं। ऐसे तमाम कार्य सीमेंट न मिलने के कारण रुके पड़े हैं। प्रदेश में हाल की में सीमेंट के बढ़े दामों को भी जनप्रतिनिधि मुख्य कारण के रूप में ले रहे हैं।

समय पर नहीं हो रहा सामग्री का भुगतान

मनरेगा के विकास कार्यों की हालत तो ऐसी है कि जिन कार्यों को पंचायतों ने निपटा दिया है, उनकी सामग्री का भुगतान भी विकास खंड विभाग समय पर नहीं कर रहा है। द्रंग भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष एवं कुफरी पंचायत की नशधरा वार्ड के जनप्रतिनिधि शेर सिंह ठाकुर ने कहा कि पंचायत में लाखों के विकास कार्य सीमेंट जारी न होने के कारण शुरू नहीं हो पाते फिर ऐसे में यदि बजट लैप्स होता है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी। उन्होंने कहा कि कुफरी एक बड़ी पंचायत है। पंचायत सचिव को अतिरिक्त पंचायत का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे पंचायत के कार्योंं में रुकावट खड़ी हो रही है और लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

मांग के अनुसार नहीं आ रहा सीमेंट

इस मामले पर विद्या देवी बीडीओ पद्धर ने कहा कि विकास खंड की पंचायतों में मनरेगा सामग्री की एक करोड़ 25 लाख 48 हजार की अदायगी देय है। मनरेगा के तहत आठ करोड़ सात लाख खर्च किए जा चुके हैं। 1150 कार्यों में से केवल 651 कार्य पूरे हुए हैं। मांग के अनुसार सिमेंट पूरा नहीं आ रहा है। जितना सीमेंट पहुंचता है, पंचायतों को जारी किया जा रहा है।

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