फिर से लौट रहा कोरोना, कई देशों में दी दस्तक

कोरोना – ये शब्द भले ही अब आम हो गया हो, लेकिन एक वक्त था जब डर का दूसरा नाम था कोरोना- लेकिन क्या आप जानते हैं कोरना फिर लौट रहा है। जी हां यह पूरी तरह से अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

कोरोना का अब एक नया वेरिएंट BA.3.2, जिसे ‘Cicada’ कहा जा रहा है। इसने अपने पांव पसारना शुरू कर दिए हैं और अब तक ये एक दो या तीन नहीं बल्कि 20 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।

ये कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट का सब-वेरिएंट बताया जा रहा है, अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में सिकाडा के मामले सामने आए हैं। दुनिया में इसका पहला मामला नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था।

सितंबर 2025 से संक्रमण के मामलों में हल्की ही सही, लेकिन बढ़ोतरी हो रही है। परेशानी की बात यह है कि इसके लक्षण आम सर्दी-जुकाम जैसे ही हैं, कुछ लोगों को उल्टी (Vomitting) या दस्त (Diarhhea) भी हो सकते हैं, जिससे लोग इसे हल्के में ले लेते हैं।

ऐसे में बिना टेस्ट के सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है और संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहता है।

वहीं दूसरी और सिकाडा वेरिएंट की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें मौजूद म्यूटेशन की संख्या है। इसमें करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे पिछले सभी वेरिएंट्स से ज्यादा संक्रामक बना सकती है और आपकी इम्युनिटी (Immunity) को चकमा देने में भी कामयाब हो सकता है, लेकिन अभी ये सपष्ट नहीं हो पाया है कि यह ओमिक्रोन के पिछले वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

हालांकि World Health Organization और Centers for Disease Control and Prevention नजर में रखे हुए हैं। अभी इसे पिछले खतरनाक वेरिएंट की तरह कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।

दूसरी और एक राहत ये भी है कि अभी तक सिकाडा वेरिएंट से संक्रमित होने पर गंभीर कॉम्प्लिकेशन के मामले नहीं देखे जा रहे हैं। अधिकांश मामले हल्के से मध्यम श्रेणी के हैं। अस्पताल में भर्ती होने की दर में भी कोई असामान्य वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।

और रही बात भारत की तो, यहां लोगों को फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है। देश में अभी सिकाडा वेरिएंट के मामले नहीं है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ट्रैवलिंग के कारण यह वेरिएंट फैल सकता है।

ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी को वैक्सीन लग चुका है, जिससे इससे बचाव में मदद मिल सकती है, लेकिन उन लोगों के लिए चिंता की बात है जो पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं या जिन्हें ‘Long COVID’ की शिकायत है।

डेटा बताता है कि आज भी हर 100 में से 3 मामलों में ‘Long COVID’ के लक्षण विकसित हो रहे हैं। इसलिए, भले ही बीमारी गंभीर न दिखे, लेकिन यह शरीर को लंबे समय के लिए कमजोर कर सकती है।

इसलिए फिलहाल इस वायरस की मूवमेंट पर नजर रखना जरूरी है और आवश्यकता पड़ने पर परहेज करना भी।