कानूनी अड़चन होगी तो अलग बात, नहीं तो प्रदेश में 31 मई से पहले होंगे पंचायत चुनाव

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज चुनाव 31 मई से पहले होंगे। कानूनी अड़चन आएगी, तो अलग बात है।

उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत टिप्पणी पर नहीं जाते, हम सेवा भाव व व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पांच वर्ष का समय मिला, लेकिन भाजपा ने प्रदेश की संपदा लुटाने का ही काम किया।

सीएम विधायक रणधीर शर्मा की तरफ से नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर दिए नोटिस की चर्चा पर जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के तहत आरक्षण का अधिकार दिया गया है और रोस्टर का अधिकार राज्य सरकार का है।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में सबसे पहले आरक्षण एससी, उसके बाद एसटी और फिर ओबीसी तथा उसके बाद महिलाओं को दिया जाएगा। सदन से बाहर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि विपक्ष के पास कोई काम नहीं रह गया है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास वाकआउट और हंगामा खड़ा करने का ही काम है। उन्होंने भाजपा में एक अलग गुट होने की बात करते हुए कहा कि रणधीर गुट द्वारा जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया, उसमें एकरूपता नहीं थी।

सीएम सुक्खू ने कहा कि हाई कोर्ट में भी हमने यह एफिडेविट दिया कि पंचायती राज चुनाव हम मई में हों, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है। उन्होंने कहा कि विपक्षी राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रकार की बात करते हैं।

सीएम ने कहा कि पांच प्रतिशत की सरकार-कैबिनेट ने डीसी को विशेष ताकत दी है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में सबसे पहले रिजर्वेशन एससी, फिर एसटी, फिर ओबीसी और फिर महिलाओं को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत का मतलब कि एक विधानसभा क्षेत्र में अगर 100 पंचायतें हैं, तो पांच प्रतिशत ऐसी पंचायत हो सकती हैं, जहां डीसी यह सोचता है कि दो-तीन बार पंचायतों रिजर्व हो गई हैं और वहां पॉपुलेशन ओपन करने की जरूरत है, तो वह कर सकता है।

गंभीर मामलों के अपराधी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए पंचायती राज अमेंडमेंट बिल-2026 में गंभीर मामलों के आरोपियों पर चुनाव लडऩे से बैन लगाने और ग्राम सभा के कोरम को कम करने जैसे अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।

यह बिल पंचायत सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। बिल के तहत अब ऐसे व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे जिनके खिलाफ किसी सक्षम अदालत में गंभीर मामलों में चार्ज फ्रेम हो चुके हैं।

कब्जाधारियों और डिफॉल्टर पर भी शिकंजा

सरकार ने इस बिल के जरिए अवैध कब्जों और वित्तीय अनियमितताओं पर भी सख्ती दिखाई है। अगर किसी व्यक्ति या उसके परिवार ने सरकारी, पंचायत या कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन पर कब्जा किया है, तो वह भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा।

इसके साथ ही जो लोग पंचायत या जिला परिषद के टैक्स, फीस या अन्य देनदारियां (ड्यूज) नहीं चुकाते, उन्हें भी अयोग्य घोषित किया जाएगा। पंचायत के कामों में सीधे हित रखने वाले लोगों पर भी रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।

ग्रामसभा कोरम में बड़ी राहत

गांवों में ग्राम सभाओं के बार-बार स्थगित होने की समस्या को देखते हुए सरकार ने कोरम में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अब ग्राम सभा की बैठक के लिए जरूरी उपस्थिति एक-चौथाई से घटाकर एक-दसवां (1/10) कर दी जाएगी।

बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ गंभीर मामलों में चार्ज फ्रेम हो चुके हैं, उन्हें सस्पेंड किया जा सकेगा।

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