आज है ‘पंजाब के शेर’ लाला लाजपत राय की जयंती

आज वीरवार को देश भर में स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है. लाला लाजपतराय जी का जन्म सन 1865 में लुधियाना के जगराव कस्बे के मुन्शी राधा कृष्ण जी के घर में हुआ. इन्होंने अम्बाला के हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उतीर्ण की. फिर लाला जी आगे की पढ़ाई के लिए लाहौर के डी ए वी कॉलेज में गये.

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लाला जी की बाल गंगाधर तिलक जी के प्रति बहुत श्रद्धा थी. कुछ समय के बाद लाला जी अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रधान चुने गये. फिर इन्होंने लाहौर हाई कोर्ट में वकालत शुरू कर दी और बहुत सफल रहे. लाला जी किसानों और जमींदारो के बनकर उभरे और इनसे अंग्रेज चिढ़ गये और इनको जेल में बंद कर दिया. लाला जी बहुत निडर और साहसी नेता थे. लोग इनको ‘पंजाब केसरी’ कहकर पुकारते थे अर्थात पंजाब का शेर.लाला लाजपत राय ‘लाल-बाल-पाल’ की तिकड़ी में भी शामिल थे.

अंग्रेजो ने लाला जी को देशद्रोही कहकर देश निकाला दे दिया. फिर ये अमेरिका आदि देशों में चले गये और भारत की आजादी का प्रचार करने लगे. फिर लाला जी जापान चले गये और पहला विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद स्वदेश लौटे. 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध करने वाले जुलुस का नेतृत्व लाला जी ही कर रहे थे. सांडर्स नामक अंग्रेज ने लोगों पर लाठियां बरसाने का आदेश दिया और लाला जी को बहुत गम्भीर चोटें आई. अंततः गम्भीर घावों की वजह से लाला जी 17 नवम्बर 1928 को स्वर्ग सिधार गये. देश इस अमर बलिदानी को हमेशा याद रखेगा.

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