हिमाचल में शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त

हिमाचल प्रदेश में रविवार को कड़ाके की शीतलहर के कारण पारा तेजी से नीचे गिर गया और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सड़कों पर बर्फ की पतली परत जमने के कारण यातायात भी प्रभावित रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 6 डिग्री नीचे दर्ज किया गया, जबकि पूरे क्षेत्र में मौसम शुष्क बना रहा। इसका सबसे गंभीर असर जनजातीय और ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में देखा गया।

लाहौल-स्पीति में सड़कों पर बर्फ की पतली पारदर्शी परत (‘ब्लैक आइस’) की वजह से फिसलन बहुत बढ़ गई, जिसके चलते प्रशासन को बार-बार यातायात परामर्श जारी करना पड़ा। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों में कई झरने जमकर बर्फ से ढ़क गए।

लाहौल-स्पीति जिले का कुसुमसेरी सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान शून्य से 10.8 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। इसके बाद ताबो (शून्य से 6.7 डिग्री नीचे तापमान), कल्पा (शून्य से दो डिग्री नीचे) , मनाली (शून्य से 1.1 डिग्री नीचे) और भुंतर (शून्य से 0.1 डिग्री निचे) रहे। ये आंकड़े ऊपरी हिमाचल में भीषण शीतलहर की पुष्टि करते हैं।

कुल्लू के बजौरा में 0.1 डिग्री, किन्नौर के रिकांगपिओ में 0.1 डिग्री, बिलासपुर के बरठीं में 0.9 डिग्री, मंडी के सुंदरनगर में एक डिग्री, हमीरपुर में 1.1 डिग्री, मंडी में 2.1 डिग्री, ऊना और बिलासपुर में 2.5 डिग्री, शिमला में 3.5 डिग्री, जुब्बरहट्टी हवाई अड्डे पास 3.8 डिग्री, कांगड़ा के देहरा गोपीपुर में 4.0 डिग्री, शिमला के सराहन में 4.4 डिग्री,

हमीरपुर के नेरी में 4.5 डिग्री, सिरमौर के नाहन में 5.1 डिग्री और पांवटा साहिब में 6.0 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
निचले जिलों में घने कोहरे ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया, जबकि शिमला, धर्मशाला और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा पसरा रहा।

सड़कों पर जमी बर्फ के कारण सिरमौर और शिमला जिलों में बसों के फिसलने की दो बड़ी घटनाएं भी सामने आईं।

मौसम विभाग ने फिलहाल तत्काल बर्फबारी की संभावना से इनकार किया है, लेकिन 16 जनवरी के आसपास एक नए पश्चिमी विक्षोभ के आने के संकेत दिए हैं।

तब तक प्रशासन ने निवासियों और पर्यटकों से रात में यात्रा करने से बचने और अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया है।