मुफ्त की योजनाओं पर सख्त सुप्रीम कोर्ट की सरकारों को नसीहत: खैरात नहीं, रोजगार दो

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों की ओर से मुफ्त की योजनाओं पर सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त सुविधाएं देने की संस्कृति की कड़ी आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।

हर किसी को फ्री में बिजली देने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में हम कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं। यह समझ में आता है कि कल्याणकारी कदमों के तहत आप उन लोगों को (फ्री) सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं, जो बिजली बिल चुकाने में असमर्थ हैं।

लेकिन जो वहन कर सकते हैं और जो नहीं कर सकते, उनमें भेद किए बिना आप इसे देना शुरू कर देते हैं, क्या यह तुष्टीकरण की नीति नहीं होगी?

अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन देना शुरू कर देंगे, फिर मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली देंगे, तो कौन काम करेगा और फिर कार्य संस्कृति का क्या होगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अधिकतर राज्यों का राजस्व घाटे में है, लेकिन वे विकास की अनदेखी करते हुए इस तरह की मुफ्त सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की मुफ्त सुविधाएं देने से देश के आर्थिक विकास में बाधा पैदा होती है। आपको लोगों के लिए रोजगार के रास्ते बनाने चाहिए, ताकि वे कमा सकें और अपनी इज्जत और आत्म सम्मान बनाए रख सकें।

जब उन्हें एक ही जगह से सबकुछ मुफ्त मिल जाएगा, तो लोग काम क्यों करेंगे। क्या हम ऐसा ही देश बनाना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अचानक चुनाव के आस-पास स्कीम क्यों अनाउंस की जाती हैं?

अब समय आ गया है कि सभी पॉलिटिकल पार्टियां, नेता फिर से सोचें। अगर हम इस तरह से उदारता दिखाते रहे, तो हम देश के विकास में रुकावट डालेंगे। एक बैलेंस होना चाहिए।

ऐसा कब तक चलेगा। दरअसल तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक याचिका दायर कर उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को नि:शुल्क बिजली प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।

कोर्ट ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार के नेतृत्व वाली बिजली वितरण कंपनी की मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया। बिजली वितरण कंपनी ने विद्युत संशोधन नियम, 2024 के एक नियम को चुनौती दी है।

यह कब तक चलता रहेगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल तमिलनाडु के संदर्भ में ही बात नहीं कर रहे हैं। हम इस तथ्य पर विचार कर रहे हैं कि चुनाव से ठीक पहले योजनाएं क्यों घोषित की जा रही हैं। सभी राजनीतिक दलों, समाजशास्त्रियों को अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह कब तक चलता रहेगा।