शिवरात्रि महोत्सव में राज माधो राय की शाही जलेब के साथ छोटी काशी में शिव भक्ति की धारा प्रवाहित हो गई है। शाही अंदाज में राज माधो राय पालकी में सवार होकर पड्डल मैदान पहुंचे और यहां पर मंडी जनपद के आए हुए देवी देवताओं से मिलन कर चांदनी में विराजमान हुए।

शिवरात्रि महोत्सव में पंजीकृत 170 देवी देवताओं और 80 के करीब गैर पंजीकृत देवताओं के आगमन से देव समागम के बीच मंडी में देव महाकुंभ भी शुरू हो गया है।
शाही जलेब के दौरान राज माधो राय पालकी में सवार होकर चलते तो जलेब के आगे देवी देवताओं के रथ भी साथ रवाना हुए। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की पहली जलेब देव ध्वनियों के साथ निकाली गई। देवताओं के साथ-साथ देवलु भी जलेब में खूब झूमे।
इस जलेब में डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और करनाल की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। इस दौरान देवलुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में देवताओं संग नृत्य किया। वातावरण ‘जय माधो राय’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
राज माधो राय मंदिर से शुरू हुई इस जलेब का रास्ता और देवी देवताओं के विराजने का स्थान 52 साल बाद बदला हुआ नजर आया है।
पड्डल में पहली बार सीढिय़ों पर पंजीकृत देवी देवताओं के विराजने की व्यवस्था की गई है और गैर पंजीकृत देवी देवता फड्डल मैदान के खाली हिस्से में ही दर्शन दे रहे हैं।
मंडी शिवरात्रि में पड्डल जाने के रास्ते में भी बदलाव किया गया था। पहली बार कालेज गेट से जलेब पड्डल मैदान से प्रवेश नहीं हुई अपितु सीधे खेल स्टेडियम के रास्ते मैदान में चली गई।
मंडी में देवी देवताओं के लिए पहली बार ही पैगोड़ा शैली के टेंट लगाए गए हैं और देवताओं को विराजने के लिए एक कतारनुमा व्यवस्था की गई है। भक्त यहीं पर देवी देवताओं के दर्शन कर रहे हैं।
रास नहीं आई व्यवस्था
पड्डल में सीढ़ियों पर विराजने की व्यवस्था तीन देवताओं को रास नहीं आई है। ये देवी देवताओं पड्डल के उसी हिस्से में विराजे हैं, जहां वह सालों से विराजते आए हैं।
इन देवी देवताओं में देव श्रृषि मार्कंडेय और ऋषि पुंडरीक शामिल हैं। इन देवताओं ने प्रशासन को पहले ही अपनी रजा से अवगत करवा दिया था।
बिन बुलाए मेहमान बनकर रह गए सैकड़ों देवता
मंडी का प्रशासन कई देवताओं तक को दरी तक नहीं दे पाया। पंजीकृत और गैर पंजीकृत की श्रेणियों में बांटे गए कुछ देवता बिन बुलाए मेहमान बनकर रह गए।
अंतराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में 100 के करीब गैर पंजीकृ त देवता पंहुचे हैं। इन देवताओं को पंजीकृत देवताओं से अलग बैठने को स्थान दे दिया गया है, लेकिन न तो उन्हें तंबू मिला है और न ही बैठने को दरी।
कॉलेज के प्रांगण में बैडिमिंटन कोर्ट में देवता बैठे हुए हैं। लोगों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। देवताओं के साथ आए पुजारियों का भी कहना है कि उन्हें सिर्फ सुविधा चाहिए, नजराना नहीं चाहिए, जो प्रशासन की ओर से देवताओं को दिया जाता है।
कारदारों को बताया था
सर्वदेवता कमेटी के अध्यक्ष पंडित शिव पाल ने बताया कि बदली व्यवस्था से सभी देव कारदारों को पहले ही अवगत करवा दिया था। इस दौरान जिन देवी देवताओं ने नए स्थान पर बैठने से इनकार किया था, उन्हें मूल स्थान पर ही विराजने की व्यवस्था की गई है। कुछ देवता पुराने स्थान पर ही विराजे हैं।































