किसानों को कृषि लोन में राहत मिलने के लिए तय हो गया नियम

आपदा का दंश झेल रहे प्रदेशवासियों के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्ज समिति की तरफ से बड़ी राहत दी जा रही है। समिति की तरफ से बैंकों को यह सुझाव दिया गया है कि जिन प्रदेशवासियों की संपत्ति 2025 की मॉनसून में आंशिक या फिर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है, उनके कर्ज की ईएमआई को बढ़ाया जाए और मोरेटोरियम अवधि प्रदान की जाए।

इसके अलावा ऋण की किस्त में स्थगन भी किया जाए, विशेष रूप से एमएसएमई, ऋणग्राही और अन्य खुदरा ऋणग्राही के लिए।

बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि आरबीआई और नाबार्ड के प्रचलित दिशा-निर्देशों के तहत राज्य के प्रभावित लोगों तक राहत उपाय तुरंत पहुंचाए जाने चाहिए।

राहत उपायों के अंतर्गत, यह सुझाव दिया गया कि कर्ज की ईएमआई को बढ़ाया जाए, मोरेटोरियम अवधि प्रदान की जाए और ऋण की किस्त में स्थगन किया जाए।

समिति के आग्रह के बाद बहुत से बैंकों ने अपने प्रबंधन से ये मामला अब उठाया है। कृषि ऋण मामलों के मामले में राज्य सरकार के संबंधित विभाग से एसएलबीसी द्वारा फसल हानि सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया है।

इन कृषि उधारकर्ताओं को केवल तभी लाभ मिलेगा, जब फसल हानि का अनुमान 33 फीसदी से अधिक हो। संदर्भ तिथि 19.6.2025 अनुमानित की गई है यानी इस दिन तक सभी ऐसे खातों की देयता नहीं होनी चाहिए।

इस राहत को समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचाने और ऐसे राहत उपायों की प्रगति की निगरानी करने के लिए एक उप-समिति का गठन किया गया है।

बैठक में एमडी और सीईओ यूको बैंक अश्वनी कुमार, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, सचिव वित्त अभिषेक जैन, क्षेत्रीय निदेशक आरबीआई अनुपम किशोर, महाप्रबंधक नाबार्ड विवेक पठानिया आदि मौजूद थे।

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