हिमाचल में ‘सूख’ गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनते ही बंद कर दी गई है। इसके चलते वर्तमान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बनने वाले टैंक और टैंक से आगे खेतों तक सप्लाई की जाने वाली पाइप न मिलने से हिमाचल प्रदेश की कृषि प्रभावित होकर रह गई है।

इस योजना में पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को करोड़ों के हिसाब से बजट मिलता आया है, लेकिन जैसे ही हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की सरकार सत्तासीन हुई, वैसे ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मिलने वाले बजट को हिमाचल प्रदेश के लिए बंद कर दिया है।

इसके तहत अब ना तो इस योजना के तहत कोई सामुदायिक टैंक का निर्माण हो रहा है और ना ही टैंक के माध्यम से आगे खेतों तक सप्लाई की जाने वाली पाइपें मुहैया हो रही है। इतना ही नहीं बल्कि इस बरसात में मची आपदा की तबाही के बाद जो प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत निर्माण कार्य हुए थे।

वह भी वर्तमान में तहस-नहस होकर रह गए हैं। इस दिशा में भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के तहत भी एक पैसा अभी तक हिमाचल प्रदेश को कृषि के विकास और उत्थान की दिशा में केंद्र सरकार से नहीं मिला है।

अगर बात की जाए कुल्लू जिला की, तो यहां पर आपदा के दौर में आठ करोड़ रुपए का नुकसान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बने विभिन्न प्रकार के टैंक कूहलें सहित सप्लाई की जाने वाले खेतों की पाइपों का हुआ है, लेकिन अभी तक इस दिशा में एक भी पैसा केंद्र सरकार की ओर से जारी नहीं किया गया है।

इस बारे में कृषि विभाग कुल्लू के सब डिविजनल सॉइल कंजर्वेशन ऑफिसर डा. अमित गुलेरिया का कहना है कि कुल्लू जिला में आपदा के दौर में आठ करोड रुपए का नुकसान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बने टैंक और कूहलों का हुआ है।

इनके रखरखाव के लिए अभी तक केंद्र सरकार से कोई भी पैसा जारी नहीं हुआ है, जिसके चलते कृषि से संबंधित कार्य पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं।

प्रदेश सरकार से साढ़े 32 लाख रुपए के वाटर टैंक और 23 लाख रुपए कूहलों के निर्माण कार्य के लिए प्रदेश सरकार की कूहल बहाव सिंचाई योजना और टैंक के लिए जल से कृषि को बल योजना के तहत प्राप्त हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार से पैसा न मिलने की सूरत में कृषि के क्षेत्र में तमाम तरह के कार्य ठप पड़े हैं।

अब वर्ष 2023-24 का सत्र में नवंबर बीत जाने को है और दिसंबर और जनवरी से लेकर फरवरी तक समय शेष है और यह आने वाले समय में ही बात स्पष्ट होगी कि केंद्र का रुख हिमाचल की ओर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की ओर क्या करवट बदलता है।

फिर लोकसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए आचार संहिता के बाद वैसे भी तमाम तरह के कार्य लटक कर रह जाएंगे।

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