हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: विलय किए गए स्कूल नहीं होंगे बंद

हिमाचल सरकार ने शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए एक और बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने छात्र व छात्राओं के स्कूलों का विलय किया था। अब विभाग ने निर्णय लिया है कि इन स्कूलों का विलय होने के बाद भी कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बल्कि दोनों कैंपस में कक्षाएं लगाई जाएंगी।

पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला का एक मनमोहक नज़ारा

ऐसे लगेंगी कक्षाएं

स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार, एक परिसर में बाल वाटिका से कक्षा आठवीं तक और दूसरे परिसर में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक कक्षाएं संचालित की जा सकती हैं। ये व्यवस्था स्थानीय जरूरत के हिसाब से तय होगी। इससे कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और खेल सुविधाओं का बेहतर उपयोग होगा।

अनावश्यक दोहराव और भीड़भाड़ से होगा बचाव

इसके अनावश्यक दोहराव और भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा। कुछ स्कूलों का विलय सीबीएसई संबद्धता की संयुक्त आधारभूत संरचना और मानव संसाधन के आधार पर दी गई है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि यह कदम केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।

एक ही प्रधानाचार्य का होगा नियंत्रण

विभाग के अनुसार, विलय किए गए विद्यालयों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को एक ही प्रधानाचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया गया है। इससे शैक्षणिक पर्यवेक्षण मजबूत होगा, स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। शिक्षण-प्रशिक्षण की एकरूपता सुनिश्चित की जा सकेगी।

शिक्षण कार्य पूर्ववत रहेगा जारी

इस व्यवस्था से कार्यकुशलता और जवाबदेही में भी वृद्धि होगी। दोनों परिसरों में शिक्षण कार्य पूर्ववत जारी रहेगा। आधारभूत ढांचे और मानव संसाधन के प्रभावी उपयोग के लिए निदेशालय द्वारा संचालन संबंधी दिशा निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।

क्या कहते हैं शिक्षा निदेशक ?

स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया कि यह विलय पूरी तरह प्रशासनिक एकीकरण है। दोनों परिसरों को एक प्रधानाचार्य के अधीन लाकर शैक्षणिक योजना, संसाधनों के उपयोग और शिक्षण प्रक्रिया की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

जल्द ज़ारी होंगे दिशा निर्देश

निदेशालय शीघ्र ही स्पष्ट संचालन दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि सरकारी संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित हो और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

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