सलोह वाले बाबा गूगा छत्री करते हैं मानसिक व शारीरिक कष्ट दूर

जोगिन्दरनगर :  काँगड़ा जिला में पालमपुर से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित है अरला गाँव. अरला गाँव से 2 किलोमीटर दूर स्थित है श्री बाबा गूगा का यह प्राचीन मंदिर. यह मंदिर अपने आप में कई विशेषताएं लिए हुए है.

सर्पदंश पीड़ित भी होता है यहाँ ठीक

लाखों श्रद्धालुओं का यहाँ आना जाना लगा रहता है. रक्षा बंधन से जन्माष्टमी तक यहाँ मेले जैसा माहौल रहता है. अगर कोई सर्पदंश से पीड़ित हो तो उसका भी यहाँ उपचार किया जाता है. इसके अलावा यहाँ मानसिक व शारीरिक कष्टों को भी दूर किया जाता है. बाबा गूगा सबकी मनोकामना दूर करते हैं.

अलसी के पौधे का है अपना महत्व

बाबा के प्रांगण में एक अलसी का बड़ा पौधा भी है. यह पौधा बुरी ताकतों को दूर भगाने में मुख्य भूमिका निभाता है. जिसके व्यक्ति के भी अंदर बुरी ताकत वास कर लेती है वह व्यक्ति इस पेड़ के चारों ओर चक्कर लगाता है. मंदिर के सेवादार सुभाष चंद बताते हैं कि इस मंदिर का बड़ा महत्व है.

निसन्तान दम्पतियों की होती है इच्छा पूरी

निसंतान दम्पति भी यहाँ झोली भर कर जाते हैं. उन्होंनें बताया कि यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है जब गूगा सलोह राजस्थान से चलकर आए और अरला की इस भूमि को पवित्र किया. यहाँ के पुजारी वेद प्रकाश यहाँ पूजा अर्चना करते हैं तथा भक्तों के कष्टों को बाबा जी की मदद से दूर करने में मदद करते हैं.

कमेटी कर रही मंदिर का विकास

स्थानीय मंदिर ने एक कमेटी भी बनाई है जिसके प्रधान वेद प्रसाद हाँ  मंदिर के विकास के लिए प्रयास कर रही है. मंदिर के सेवादार ने jogindernagar.com की टीम को बताया कि यहाँ रक्षा बन्धन और जन्माष्टमी के दिन जागरण का आयोजन किया जाता है इसके अलावा शांति हवन कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं. उन्होंनें बताया की श्रद्धालुओं के लिए यहाँ रात को ठहरने की व्यवस्था भी है.

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