हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी और पर्यटन के लिए दिल्ली से एक बेहद सुखद खबर आई है। केंद्र सरकार ने अपनी महत्त्वाकांक्षी उड़ान योजना के संशोधित स्वरूप को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगले 10 वर्षों में देश के हवाई नेटवर्क को बदलने के लिए 28,840 करोड़ का विशाल बजट आबंटित किया गया है।
यह घोषणा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तारीकरण और प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की नई उम्मीदें जगाने वाली है। हिमाचल प्रदेश सरकार वर्तमान में कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है।
ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा पुरानी हवाई पट्टियों को विकसित करने और नए बुनियादी ढांचे के लिए 12,159 करोड़ रुपए की प्रत्यक्ष बजटीय सहायता का ऐलान, प्रदेश के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के अंतर्गत कांगड़ा एयरपोर्ट को शामिल करने से इसके विस्तारीकरण की राह में आने वाली वित्तीय और तकनीकी बाधाएं दूर होंगी, जिससे भविष्य में यहां बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि आगामी विकास चैलेंज मोड में होगा, यानी जो राज्य जमीन और पर्यावरणीय मंजूरी तेजी से मुहैया कराएंगे, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
हिमाचल प्रदेश पहले ही इस प्रक्रिया को पूरा करने में जुट गया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव के लिए शुरुआती तीन वर्षों तक प्रति एयरपोर्ट 3.06 करोड़ की वार्षिक मदद दी जाएगी, जिससे राज्य के खजाने पर बोझ भी कम होगा।
आर्थिकी और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
अब संशोधित योजना के तहत 2026 से 2035 के बीच चार करोड़ यात्रियों का लक्ष्य रखा गया है। अगर हिमाचल के हवाई अड्डों का विस्तार इस योजना के तहत होता है, तो प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
दुर्गम राहें होंगी आसान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले में 200 नए आधुनिक हेलिपोर्ट बनाने का प्रावधान भी शामिल है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह योजना गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
राज्य सरकार चैलेंज मोड के तहत अपने दूरदराज के पर्यटन स्थलों और जिला मुख्यालयों को इस नेटवर्क से जोड़ सकती है। इससे न केवल पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और आपदा प्रबंधन में भी प्रदेश को मजबूती मिलेगी।































