छोटी काशी मंडी में चल रहा सात दिवसीय शिवरात्रि महोत्सव रविवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल की अध्यक्षता में धूमधाम से सम्पन्न हो गया।

शिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन चौहटा में देवी-देवताओं ने विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। चौहटे री जातर में एक साथ 200 से अधिक देवी-देवता विराजे। सात दिनों के देव समागम के बाद अंतिम दिन भावुक विदाई दी गई।
देवी देवताओं के शहर से जाने के बाद शहर सूना पड़ गया। अब छेाटी काशी मंडी में फिर से एक साल का इंतजार शुरू हो गया। अगले वर्ष फिर यह देव समागम सजेगा और देवी देवता छोटी काशी पंहुचेंगे। चौहटे री जातर के बाद देवी-देवता अपने-अपने धामों में लौट गए हैं।
शिवरात्रि के अंतिम दिन राजाओं के समय से चली आ रही पंरपरा का निर्वहन करते देवता चौहटा में बैठे। राजाओं के शासन काल में चौहटा में ही देव दरबार सजता था, लेकिन समय के साथ-साथ कई बदलाव हुए और पड्डल में देवी-देवताओं को बैठाना शुरू किया गया।

लेकिन परंपरा निभाने आज भी देवता चौहटा आते हैं और यहां बैठकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। स्थानीय मान्यता है कि जो श्रद्धालु सप्ताह भर किसी कारणवश देव दर्शन नहीं कर पाते, वे इस दिन एक साथ सभी देवी-देवताओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
यही कारण है कि समापन दिवस पर यहां सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। आठ दिनों से टारना माता मंदिर में विराजमान देव कमरूनाग भी इस विशेष अवसर पर बाजार पहुंचकर सेरी की सीढ़ियों पर विराजते हैं।
देव सेरी चानणी परिसर में विराजे और वहां से अपने भक्तों के घरों की ओर प्रस्थान की परंपरा निभाई गई। देव कमरूनाग के देवलुओं ने बताया कि वे सप्ताह भर की पैदल यात्रा के बाद पुन: अपने मूल स्थान की ओर लौटेंगे।
उपायुक्त मंडी ने भी चौहटा पहुंचकर देवी-देवताओं के समक्ष शीश नवाया और जिले की सुख-समृद्धि की कामना की।
चौहटा में तिल धरने की जगह नहीं
चौहटे री जातर में जन सैलाब उमड़ पड़ा। छोटी काशी में पिछले सात दिनों से चल रहा भव्य देव समागम रविवार को भावुक माहौल के बीच संपन्न हुआ। सुबह से ही बाजार में भक्ति, आस्था और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। चौहटा देवी-देवताओं और भक्तों से भरा दिखा।
सैकड़ों ने किए देवताओं के दर्शन, लिया आशीर्वाद
सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव भव्य आयोजन का समापन रविवार को हो गया। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की ‘छोटी काशी’ कही जाने वाली मंडी नगरी, जो पिछले एक सप्ताह से देव-समागम के कारण ‘स्वर्ग लोक सी’ बनी हुई थी, अब सूनी पड़ जाएगी।
अपने मूल स्थानों की ओर प्रस्थान करते देवी-देवताओं और उनके साथ आए हजारों देवलुओं की विदाई से मंडी का माहौल भावुकता से भर उठा। रविवार दोपहर बाद जैसे ही देवी-देवताओं ने अपने मूल स्थानों की ओर रुख किया, समूचा मंडी शहर विछोह की लहर में डूब गया।
सात दिनों तक जिन गलियों में ढोल-नगाड़ों और करनाल की गूंज सुनाई दे रही थी, वहां अब एक सन्नाटा सा पसर गया है।मंडी जनपद के देवी-देवताओं की यह वापसी भी किसी उत्सव से कम नहीं है।
हालांकि महोत्सव आधिकारिक तौर पर संपन्न हो गया है, लेकिन देवताओं को अपने मूल मंदिरों तक पहुँचने में 5 से 10 दिन का समय लगेगा। परंपरा के अनुसार, लौटते समय देवता रास्ते में अपने विभिन्न भक्तों के घर ‘मेहमाननवाजी’ स्वीकार करते हैं।
भक्त अपने घरों में देव-टोली के लिए विशेष भोज का आयोजन करते हैं, जिससे गांव-गांव में अभी भी उत्सव सा माहौल बना रहेगा।
महोत्सव का आखिरी दिन होने और रविवार की छुट्टी होने के कारण मंडी में जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को मंडी के ऐतिहासिक चौहटा बाजार में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए तिल रखने तक की जगह नहीं थी।































