हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार को लेकर केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में बड़ा प्रावधान किया है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां प्रदेश को औसतन 108 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह राशि बढ़कर 2716 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष पहुंच गई है, जो 25 गुना से अधिक वृद्धि दर्शाती है।
पहली अप्रैल, 2025 की स्थिति के अनुसार हिमाचल में 17,622 करोड़ रुपए की लागत वाली 214 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइनें स्वीकृत हैं।
इनमें से 64 किलोमीटर लाइन चालू की जा चुकी है और मार्च, 2025 तक 8,280 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। नंगल डैम-ऊना-अंदौरा-दौलतपुर चौक खंड (60 किमी) शुरू हो चुका है, जबकि दौलतपुर चौक-तलवाड़ा (52 किमी) और 1540 करोड़ की लागत वाली चंडीगढ़-बद्दी (28 किमी) लाइन पर कार्य प्रगति पर है।
63 किलोमीटर लंबी भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल परियोजना 6,753 करोड़ रुपए की स्वीकृत लागत से बनाई जा रही है, जिसमें 75 प्रतिशत केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य की हिस्सेदारी है। भूमि की 1,617 करोड़ रुपए की लागत भी राज्य सरकार को वहन करनी है।
परियोजना के लिए 124 हेक्टेयर भूमि में से अब तक केवल 82 हेक्टेयर ही उपलब्ध कराई गई है। केंद्र के अनुसार, राज्य सरकार को 2,781 करोड़ रुपए देने थे, लेकिन अब तक केवल 847 करोड़ रुपए ही जमा किए गए हैं, जिससे 1,934 करोड़ रुपए बकाया हैं।
भूमि और धन की कमी के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है। अब तक इस परियोजना पर 7,729 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। बद्दी-घनौली (25 किमी) नई लाइन का सर्वे और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, जो स्वीकृति प्रक्रिया में है।
रेल मंत्रालय की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 1337 स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। हिमाचल के चार स्टेशन—अंब अंदौरा, बैजनाथ पपरोला, पालमपुर हिमाचल और शिमला इस योजना में शामिल हैं।
अंब अंदौरा और बैजनाथ पपरोला में विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि पालमपुर और शिमला में मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
उत्तर रेलवे जोन को वित्त वर्ष 2025-26 में 1,483 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं, जिनमें से दिसंबर, 2025 तक 1,308 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।





























