महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम करीब 5 बज कर 4 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी शाम तक रहेगी।

चूंकि महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा, अभिषेक और जागरण रात्रि में होता है। विशेषकर निशीथ काल में, इसलिए व्रत और पूजन 15 फरवरी की रात को ही किया जाएगा।
इस बार लक्ष्मी नारायण योग बुध-शुक्र की युति का निर्माण हो रहा है। यह संयोग करीब 19 साल बाद बन रहा है। इससे धन, समृद्धि और आर्थिक लाभ की संभावना बढ़ती है।
चतुग्र्रही योग सूर्य, बुध, शुक्र और राहु कुंभ राशि में एक साथ बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग दिन में मौजूद रहेगा, जो सभी कार्यों में सफलता और बाधा निवारण देता है।
अन्य योग बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग, व्यतीपात योग और कुछ नक्षत्र संयोग भी पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा राशि अनुसार करने से ग्रह दोषों का निवारण होता है।
मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विशेष लाभ मिलता है। ज्योतिषीय संयोग इस बार कुंभ राशि में चतुग्र्रही योग सूर्य, बुध, शुक्र, राहु के कारण मेष, कन्या, मकर और कुंभ राशियों पर सबसे ज्यादा कृपा बरसने वाली है। धन, करियर, विवाह और समृद्धि में तेजी आएगी।
ऐसे दूर होंगे राशियों के दोष
मेष — शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंड) चढ़ाएं। ? नम: शिवाय का 108 बार जप करें। मंगल दोष दूर और करियर में तरक्की।
वृषभ — शिवलिंग पर दूध और सफेद चंदन से अभिषेक करें। ? त्र्यम्बकं यजामहे मंत्र जपें। रूके काम बनें, सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।
मिथुन — शिवलिंग पर दही चढ़ाएं। लक्ष्मी नारायण योग का लाभ लें। हर कामना पूर्ण और धन प्राप्ति होगी।
कर्क — सामान्य शिव पूजा सहित धतूरा या शमी पत्र अर्पित करें। मानसिक शांति, पारिवारिक सुख मिलेगा।
सिंह- शिवलिंग के आगे घी का दीया जलाएं। असीम कृपा, धन-प्राप्ति, आत्मविश्वास बढ़ेगा।
कन्या — विधि-विधान से पूर्ण शिवलिंग पूजा करें। जल, दूध, दही, घी, शहद, जल अभिषेक करें। चतुग्र्रही योग का मजबूत प्रभाव। ग्रह दोष निवारण, धन आवक बढेगी।
तुला — शहद मिला जल चढ़ाएं। जोखिम वाले कार्यों में सफलता, रिश्तों में मधुरता आएगी।
वृश्चिक — बेलपत्र या रुद्राक्ष अर्पित करें। स्वास्थ्य लाभ और शत्रु नाश होगा।
धनु — सामान्य पूजा सहित ? नम: शिवाय का जाप करें। आध्यात्मिक उन्नति मिलेगी।
मकर — शमी पत्र या दूध से अभिषेक। चतुग्र्रही योग से विशेष लाभ। शनि-शिव कृपा, बाधाएं दूर होंगी।
कुंभ — पूर्ण अभिषेक पंचामृत सहित महामृत्युंजय मंत्र जप। चतुग्र्रही योग यहां केंद्रित। राजयोग, तरक्की के द्वार खुलेंगे।
मीन — फूलों या सुगंधित इत्र चढ़ाएं। सकारात्मक ऊर्जा, रिश्तों में सुधार होगा।
सामान्य टिप्स सभी राशियों के लिए
निशीथ काल रात 12:09 से 1:01 बजे तक में पूजा करें।
चारों प्रहर पूजा और जागरण करें।
नम: शिवाय कम से कम 108 या 1008 बार जपें।
शमी पत्र के 5 से 7 या 108 चढ़ाने से धन-विवाह बाधाएं दूर होती हैं।
व्रत रखें, भस्म तिलक लगाएं, बेलपत्र-धतूरा अर्पित करें।






























