धौलाधार की वादियों में खूबसूरत रंग-बिरंगे फूलों के साथ आईएचबीटी पालमपुर का ट्यूलिप गार्डन तैयार है। देश-विदेश में पहचान बना चुका पालमपुर स्थित सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान का ट्यूलिप गार्डन 10 फरवरी से दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा।

इस बार गार्डन में ट्यूलिप की छह किस्मों के 50 हजार बल्ब रोपे गए हैं। कश्मीर के बाद देश का दूसरा और प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ वर्ष पूर्व पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था।
इसमें ट्यूलिप्स की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है। यह गार्डन हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा एवं पर्यटन को अग्रसर करने में मदद कर रहा है।
पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान केंद्र सरकार और सीएसआईआर द्वारा 2021 में षुरु किए गए फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत फूलोत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।
इससे अधिक से अधिक किसानों को जोड़ उनकी आय दोगुना करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हिमाचल की जलवायु फूलोत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त है, जब मैदानों में फूल नहीं उगते, हिमाचल में उस समय भी फूल तैयार होते हैं।
सीएसआईआर फ्लोरीक्लचर मिशन का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है। आईएचबीटी संस्थान ने ट्यूलिप बल्ब प्रोडक्शन पर काम किया है, उसके बेहतरीन परिणाम आ रहे हैं।
गौर रहे कि भारत में हालैंड से ही ट्यूलिप के बल्ब मंगवाए जाते रहे हैं, लेकिन अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों ने देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव का संकेत दे दिया है।
सौरभ वन विहार में भी प्रयास
पालमपुर के प्रमुख्य पर्यटक स्थल सौरभ वन विहार में भी वन विभाग के साथ मिलकर आईएचबीटी ने ट्यूलिप गार्डन के प्रयास शुरू किए हैं। प्रयोगात्मक तौर पर सौरभ वन विहार में ट्यूलिप के तीन हजार बल्ब लगाए गए हैं।






























