कांगड़ा में रोमांच की तलाश में ‘मौत’ की उड़ान

हिमाचल प्रदेश के पर्यटन राजधानी के रूप में पहचान बनाने वाले जिला कांगड़ा में हवाओं के रोमांच में अनियमितताओं के चलते आए दिन हादसे हो रहे हैं।

International Paragliding World Cup 2012
बीड़ बिलिंग की पहाड़ियों में मानव परिंदे

पिछले दो दशक में जिला कांगड़ा में 15 से अधिक बड़े हादसे हो चुके हैं, जिसमें विदेशी पॉयलट संग टेंडम फ्लाइट में भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

कांगड़ा में अब तक पर्यटन विभाग के पास पैराग्लाइडिंग वैध रूप से करवाए जाने के लिए कुल चार साइट्स पंजीकृत हैं। बैजनाथ के बीड़-बिलिंग, धर्मशाला के इंद्रूनाग, ज्वालामुखी के बिल पट्टियां शामिल हैं, इसमें चौथी साइट के रूप में नरवाणा भी है, जो कि सैन्य विभाग की तरफ से रिन्यू के लिए अभी पेंडिंग चल रही है।

जिला भर में साहसिक खेल पैराग्लाइडिगं के लिए कुल 384 पॉयलटों ने पंजीकरण करवाया है, जिसमें 284 पॉयलट लाइसेंस धारी हैं, जो कि टेंडम फ्लाइट यानी दूसरे व्यक्ति को अपने साथ लेकर फ्लाई करने के लिए अधिकृत हैं, जबकि150 पायलट लाइसेंस प्राप्त कर टेंडम फ्लाइट उड़ाने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

इसमें अब तक उक्त फ्लाइट को मनाली में स्थित संस्थान में एसआईजी स्पेशल इंट्रस्ट ग्रुप की कसौटियों से पार पाना होगा। इसके तहत ही उक्त 150 पायलटों को लाइसेंस दिए जाएंगे।

बीड़ बिलिंग विश्व की दूसरी व देश की पहली बेहतरीन व खूबसूरत पैराग्लाइडिंग साइट है। यहां हवाबाजी के खेल के कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हो चुके हैं।

यह साइट जितनी खूबसूरत है, उतनी ही खतरनाक भी है। दो दशकों में एक दर्जन पायलटों की जिंदगी लील चुकी है, और कईयों को गहरे जख्म दे चुकी है। -एचडीएम

384 पॉयलट पंजीकृत

जिला कांगड़ा के पर्यटन अधिकारी विनय धीमान ने बताया कि जिला में चार पैराग्लाइडिंग साइट पंजीकृत हैं, जिसमें 384 पॉयटल पंजीकृत हैं, इनमें 284 को टेंडम उड़ान के लिए लाइसेंस मिले हैं।

हर साइट में मार्शल की तैनाती की जाती है, जिसमें नियमों को ध्यान में रखने पर ही उड़ान भरने की अनुमति होती है।

छह बार प्री, एक बार वर्ल्ड कप

बिलिंग घाटी में छह बार पैराग्लाइडिंग प्री वर्ल्ड कप का आयोजन हो चुका है। वर्ष 2015 में पहली दफा देश के पहले पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप का आयोजन यहां हुआ था।

बिलिंग बैजनाथ उपमंडल के बीड़ गांव से 14 किलोमीटर ऊपर धौलाधार की पहाड़ी पर स्थित है। यहां इटली के बाद विश्व का दूसरी बेहतरीन पैराग्लाइडिंग साइट है।

यहां से दो सौ किमी तक उड़ान की सुविधा है। यह साइट 1984 में अस्तित्व में आई थी, जबकि इंद्रूनाग में पर्यटक उड़ानें होती हैं, वहीं नरवाणा में दो बार प्री-एक्यूरेसी वर्ल्ड कप के आयोजन हो चुके हैं।

कांगड़ा में अब तक कितने हादसे

  • साल 2004 में चंडीगढ़ के केके टंडन की टेंडम फ्लाइंग से गिरने से मौत,
  • 2009 में रूस के डेनिस व फायल आदि हिमानी चामुंडा की पहाड़ियों में फंसकर घायल,
  • 2009 में रूस के फ्री फ्लायर उडेन का शव पहाड़ियों में भेड़पालकों को मिला,
  • 2012 अमेरिका के 75 वर्षीय पायलट रॉन व्हाइट की उतराला की पहाड़ियों में मौत,
  • 2015 में उज्बेकिस्तान के पायलट कोनस्टेनटिन की मौत,
  • 2015 में यूनाइटेड किंग्डम की रूथ फ्री फ्लाइंग के दौरान गिरने से घायल,
  • 2016 में घोघरधार में एचटी लाईन की चपेट में आने से रूस के पायलट की मौत,
  • 2018 में उतराला में सिंगापुर के पायलट कोक चांग की मौत हो गई थी।
  • 2018 में सेना के एक्यूरेसी पैराग्लाइडिंग कप के दौरान थल सेना के चार पायलट लापता हो गए थे, और एक की मौत हो गई थी।
  • 2018 में पैराग्लाइडिंग के दौरान सिंगापुर में कमांडो 53 वर्षीय एनजी कॉकचूंग की गई जान,
  • 2020 में फरवरी में टेंडम फ्लाइट का प्रशिक्षण लेते छोटा भंगाल के 24 वर्षीय युवक की मौत,
  • 2020 में फ्रांस के पायलट की प्रशिक्षण के दौरान गई थी जान,
  • 2021 जनवरी में नई दिल्ली के एक पायलट रोहित भदोरिया की उड़ान भरने के दौरान मौत,
  • 2025 में इंद्रूनाग साइट पर जनवरी में अहमदाबाद की 19 वर्षीय युवती की मौत,
  • व अब बनगोटू में 13 जुलाई, 2025 को इंद्रनाग साइट पर 25 साल के गुजराती टूरिस्ट की मौत हुई है।
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