जिला कैडर के कर्मचारियों का किसी दूसरे जिले में तबादला पाने का कोई निहित अधिकार नहीं: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिला कैडर के कर्मचारियों का किसी दूसरे जिले में तबादला पाने का कोई निहित अधिकार नहीं है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने अंतर जिला तबादला चाहने वाले जेबीटी अध्यापक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अंतर जिला तबादलों की नीति के संदर्भ में, किसी कर्मचारी को अपनी इच्छा से एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करने का कोई निहित अधिकार नहीं दिया गया है।

कोर्ट ने सरकार की इस दलील से सहमति जताई जिसमें कहा गया था कि जब किसी कर्मचारी की भर्ती जिला कैडर के पद पर होती है तो वह उस विशेष जिले में नियोक्ता की सेवा करने के लिए बाध्य होता है और अंतर जिला तबादलों के अनुरोध पर विचार करना प्राधिकरण के विवेकाधिकार पर निर्भर है।

कोर्ट ने कहा कि अंतर जिला तबादलों को प्रभावी करने के लिए प्राधिकरण को दिया गया यह विवेकाधिकार प्राधिकरण द्वारा मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

मामले के अनुसार प्रार्थी के प्रतिवेदन को अस्वीकार करते हुए सक्षम प्राधिकारी ने अपने आदेश में उल्लेख किया था कि सोलन के प्राथमिक शिक्षा उपनिदेशक से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सोलन जिले में जेबीटी/एचटी के 1813 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से लगभग 363 पद रिक्त हैं।

प्राधिकारी द्वारा इस आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि अंतर जिला स्थानांतरण अधिकार का विषय नहीं है और शिक्षकों का स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकताओं और छात्रों के हित में नीति के तहत किया जा सकता है।

आदेश में आगे उल्लेख किया गया था कि रिक्त पदों की महत्वपूर्ण संख्या को देखते हुए याचिकाकर्त्ता के अनुरोध के अनुसार याचिकाकर्त्ता का स्थानांतरण छात्रों के शैक्षणिक हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।

याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने भी प्राधिकारी द्वारा विवादित आदेश में की गई टिप्पणियों से सहमति जताई।

कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा कि सोलन जिले में जेबीटी/एचटी के 350 से अधिक पद वास्तव में रिक्त थे, जिस तिथि को प्राधिकरण ने याचिकाकर्त्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय लिया था और यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्त्ता का सोलन जिले से मंडी जिले में स्थानांतरण उक्त संख्या को और कम कर देगा, जिसका याचिकाकर्त्ता के वर्तमान विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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