बुझ गई एक और ज्योति

हालात कुछ भी रहे हों, लेकिन यह सत्य है कि एक और ज्योति बुझ गई। उसने सपने तो नौकरी करके मायके व सुसराल दोनों में उजाला करने के देखे थे, लेकिन उसे सुकून भरी मौत भी नसीब नहीं हो सकी। यह भी दुखद है कि पुलिस ज्योति को इतने दिनों में तलाश भी नहीं कर सकी।

लाचार माता-पिता ने जिसे पाल पोस कर इतना बड़ा व सुंदर बनाया था, वह गायब होने के बाद जब मिली तो एक छोटे थैले ने ही उसके कंकाल को समेट लिया। जिसे देख कर न तो मां बाप की आंखों के आंसू रूक रहे हैं और न ही मन में गुस्सा समेट पा रहे हैं। ऐसा कोई भी नहीं होगा जिसकी आंखों से ज्योति की दशा देखकर आंसू न निकले हों। यही वजह है कि अब ज्योति की मां ने इस मामले में दोषी के खिलाफ फांसी की सजा की मांग की है।

यह दुखद कहानी उपमंडल की ग्राम पंचायत भराड़ू के गडूही गांव में ब्याहता ज्योति की है। ज्योति आठ अगस्त को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से अपने पालतू कुत्ते के साथ लापता हो गई थी। इतने दिनों बाद अब उसका नाममात्र कंकाल पांडो के समीप मकोड़ा के घने जंगल में बरामद हुआ है। कंकाल मिलने के बाद जहां उसका मायका पक्ष बेहद सदमे में है, वहीं बेहद गुस्से में भी हैं। परिवार का जहां रो-रो कर बुरा हाल है।

ज्योति की माता सावित्री देवी मामले में दोषी के लिए फांसी की सजा की गुहार भी लगा रही हैं। ‘दिव्य हिमाचलÓ के साथ बातचीत में मृतका ज्योति की माता सावित्री देवी का कहना है कि उनकी बेटी इतनी कमजोर नहीं थी कि आत्महत्या जैसा कदम उठाए।

उनका आरोप है कि उसकी बेटी की हत्या कर उसे जंगल में फेंका गया तथा इसके लिए दोषी के लिए फांसी की सजा भी कम है। 26 अगस्त को ज्योति के मायका पक्ष द्वारा ग्रामीणों के साथ मिलकर माकपा नेता कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में ज्योति का पता लगाने को लेकर यहां प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी जोगिंद्रनगर पुलिस ज्योति का कुछ पता नहीं लगा सकी।

ज्योति के परिजनों ने जून 2019 में उसका घर बसाने के उद्देश्य से उसकी शादी कर उसे घर से विदा किया लेकिन उन्हें क्या पता कि शादी के महज सवा दो वर्षों में उनकी बेटी ही इस दुनिया से विदा हो जाएगी।

ज्योति की माता सावित्री देवी का कहना है कि ज्योति की शादी के पश्चात लगभग 6 माह तक तो सब ठीक-ठाक रहा लेकिन उसके पश्चात उसे टार्चर किया जाने लगा। जिसे लेकर वह लोग उसके ससुराल में भी गए व समझा बुझा कर सब ठीक हो गया, लेकिन उसके पश्चात भी उनकी बेटी दिन प्रतिदिन शारीरिक तौर पर कमजोर होती गई। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पढ़ी-लिखी थी तथा एक कम्पयूटर सेंटर में भी तीन वर्ष तक शिक्षिका के तौर पर सेवांए दे चुकी है।

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