शिलान्यास-उद्घाटन पट्टिकाओं पर नहीं लगेंगे पूर्व विधायकों के नाम

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में घोषणा की है कि अब किसी भी तरह की शिलान्यास और उद्घाटन की पट्टिका पर पूर्व विधायकों के नाम नहीं लगेंगे, जब तक वे किसी सरकारी ओहदे पर न हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुने हुए विधायक का ही मान होना चाहिए और इस बारे में सरकार सभी विभागों को निर्देश जारी करेगी। जो अधिकारी इन निर्देशों की अवहेलना करेगा, उसके ऊपर कार्रवाई करेंगे।

मुख्यमंत्री द्रंग से भाजपा विधायक पूर्ण चंद ठाकुर द्वारा उठाए गए मामले का जवाब दे रहे थे। पूर्ण चंद ठाकुर ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में सीनियर सेकेंडरी स्कूल धार के भवन के उद्घाटन, ग्राम पंचायत बह के भवन के उद्घाटन और दूध उत्पादन केंद्र कुन्नू के उद्घाटन समारोह में सांसद प्रतिभा सिंह के साथ हारे हुए प्रत्याशी का नाम डाल दिया, इसलिए सरकार बताए कि नियम क्या हैं?

जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बारे में कोई लिखित दिशा निर्देश अभी नहीं हैं, लेकिन सरकार खुद ऐसे निर्देश जारी करेगी। उन्होंने कहा कि हर विधायक 5 साल के लिए चुना जाता है और दोबारा जनादेश लेने के लिए जनता के बीच जाता है।

इसलिए यह जनता पर निर्भर है कि वह दोबारा उसे भेजती है या नहीं? उन्होंने कहा कि कौल सिंह ठाकुर कांग्रेस के सम्मानित सदस्य हैं और इस सदन के भी सदस्य रहे हैं।

वह सात बार विधायक और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र का तकाजा है कि चुने हुए विधायक को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। ऐसी घटनाएं बार-बार न हो, इसलिए इस विवाद को यहीं खत्म करते हैं और अब इस बारे में निर्देश जारी होंगे।

अनुपूरक सवाल में सुंदरनगर से भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने भी सवाल पूछा कि जहां उद्घाटन या शिलान्यास पट्टिका पर हारे हुए व्यक्ति का नाम डाल दिया गया है, क्या सरकार उसको दुरुस्त करेगी?

मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि यदि विधायक इस बारे में लिखकर देंगे तो इसको लेकर सरकार विचार करेगी और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएगी।

अनुपूरक सवाल में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र के सीनियर सेकेंडरी स्कूल बगस्याड के वार्षिक कार्यक्रम में गये, लेकिन सरकार के नजदीकी कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने इतना दबाव बनाया की तीन दिन के भीतर सारे स्कूल का स्टाफ ही ट्रांसफर कर दिया गया।

यहां तक कि मुख्यमंत्री निवास ओक ओवर में लोगों के बैठने के लिए उन्होंने एक संवाद कक्ष और लिफ्ट बनाई थी। इसकी उद्घाटन पट्टिका को भी उतार दिया गया। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास में किसी भी तरह की पट्टिका को नहीं हटाया गया है, न ही इसकी जानकारी उन्हें है।

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