मंडी की कुर्सी पर दिल्ली की भी नजर

प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों व मंडी संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज आ जाएंगे। नतीजों को लेकर भाजपा कांग्रेस के साथ बागियों की धड़कनें भी बढ़ी हुई हैं, लेकिन उप चुनाव में मंडी सीट के चुनावी रण के नतीजों पर पूरे प्रदेश के साथ दिल्ली तक की नजरें टिकी हुई हैं।

विधानसभा चुनावों में लगभग हाशिये पर जा पहुंची कांग्रेस अब उपचुनाव से वापसी करेगी या फिर भाजपा की बड़ी जीत के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कद और ऊंचा हो जाएगा, इस पर मंगलवार दोपहर होते-होते पर्दा उठ जाएगा। भाजपा को मंडी जिला, तो फिर कांग्रेस ऊपरी क्षेत्रों व कुल्लू जिला से बड़ी लीड की उम्मीद लगी हुई है।

सराज में हुई बंपर वोटिंग से भाजपा जरूर राहत में है, लेकिन महंगाई का मुद्दा भाजपा के लिए जरूर परेशानी वाला है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह संसदीय क्षेत्र होने और दूसरी तरफ कांगे्रेस में स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के परिवार से प्रतिभा सिंह के मैदान में होने के कारण मंडी संसदीय सीट का उप चुनाव काफी हाईप्रोफाइल हो चुका है।

यही वजह है कि इसके नतीजों पर पूरे प्रदेश की जनता के साथ ही भाजपा कांग्रेस की हाईकमान तक दिल्ली से नजरें गड़ाए बैठी है। सोमवार को पूरे संसदीय क्षेत्र और खासकर मंडी जिला में हार जीत की चर्चाओं को लेकर माहौल गरमाया रहा। मंडी संसदीय सीट के लिए 30 अक्तूबर को क्षेत्र के 17 विधानसभा सीटों पर 57.71 प्रतिशत मतदान हुआ है।

जो कि पिछले आम चुनावों के मुकाबले काफी कम है। वहीं, 2013 में भी इसी सीट पर उप चुनाव हुआ था और उस समय 51.80 प्रतिशत मतदान हुआ था। उस समय चुनाव में प्रतिभा सिंह ने भाजपा नेता व वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को 1.36 लाख मतों से हराया था। (एचडीएम)

भितरघात, महंगाई, विकास व नोटा फैक्टर के भंवर में फंसे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मंगलवार को हो जाएगा। अर्की निर्वाचन क्षेत्र की जनता ने किस मुद्दे को आधार बनाकर मतदान किया है, इसका रहस्य ईवीएम में कैद है। यह पहला अवसर है कि जब भाजपा व कांग्रेस के बड़े नेताओं को जनता ने दुर्गम व अति ग्रामीण क्षेत्र की पगडंडियां नापने पर मजबूर कर दिया था।

भाजपा ने पूरे अर्की निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक पोलिंग बूथ के एक-एक मतदाता से जहां संपर्क करके विकास के दम पर भाजपा के पक्ष में मतदान करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, वहीं कांग्रेस ने महंगाई की तख्ती उठाकर जनमानस को कांग्रेसी प्रत्याशी के लिए मतदान करने की अपील की। अर्की निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता पूरे हिमाचल में इसलिए भी हटकर माने जाते हैं कि यहां पर परिणाम घोषित होने से पूर्व वे अपने पत्ते नहीं खोलते हैं।

भाजपा व कांग्रेस में इस बार जमकर भितरघात होने के कयास लगाए जा रहे हैं। अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधारा का झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता रात्रि को विपक्षी खेमे से तालमेल करते हुए भी नज़र आए। इस बार दोनों पार्टियों में भितरघात ने आज तक की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। अब यह भितरघात किस पार्टी में कितने स्तर पर हुआ मंगलवार को इसका परिदृश्य साफ हो जाएगा।

भाजपा ने उपचुनाव को विकास के मुद्दे पर लड़ा तथा भाजपा के सत्ता में एक साल के शेष बचे कार्यकाल को भुनाने की अपील मतदाताओं से की गई। दूसरी ओर कांग्रेस ने महंगाई के मुद्दे को जनता के बीच रखा। अर्की उपचुनाव में इस बार नोटा का भी व्यापक असर रहने वाला है।

वर्ष 2017 के चुनाव में करीब 450 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया था, परंतु इस बार स्वर्ण आयोग के गठन पर मुखर होकर एक वर्ग के कारण यह आंकड़ा डेढ़ हजार से भी ऊपर जा सकता है। अर्की निर्वाचन क्षेत्र में कुल 91884 मतदाता थे, परंतु उसमें सिर्फ 59701 मतदाताओं ने ही अपने मत का प्रयोग किया। इस तरह कुल 64.97 प्रतिशत मतदाता ही पोलिंग बूथों तक पहुंचे।

मंगलवार को अर्की उपचुनाव में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हो जाएगा। एसडीएम अर्की शहज़ाद आलम ने बताया कि अर्की स्कूल में प्रात: आठ बजे से मतगणना आरंभ हो जाएगी। इस बार कोविड के कारण मतगणना के लिए छह टेबल ही लगाए गए हैं, जबकि पहले चुनावों में 14 टेबल होते थे। चुनाव के पूरे नतीजे दोपहर बाद तीन बजे तक आने की उम्मीद है।

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