12 साल से भाषणों तक सिमट कर रह गई यह टनल

पिछले 12 वर्षों से कुल्लू और मंडी जिला को जोड़ने वाली प्रस्तावित भूभू जोत टनल सियासत में ही गरमाती रही। भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने विधानसभा, लोकसभा चुनाव में वोट बटोरने के लिए खूब मुद्दा बनाया, लेकिन सियासत हासिल करने पर मुद्दे को भाषणों से आगे नहीं ले जाया गया।

जुबाणी बाण में बनी टनल

जुवाणी बाण से आगे नहीं बढ़ी

लिहाजा, जनता झूठे आश्वासनों में पिसती रही। हिमाचल में दोनों पार्टियों की सरकारें रहीं हो या लोकसभा पहुंचे मंडी संसदीय क्षेत्र के सांसद रहे हों, लेकिन इनके जुवाणी बाण से आगे भूभू जोत टनल नहीं बढ़ी। अब तो लगभग दोनों पार्टियों के पुराने नेता लोकसभा चुनाव 2024 में बाहर हो गए हैं।

धरातल पर उतार नहीं पाए

पुराने नेता प्रस्तावित भूभू जोत टनल को धरातल पर उतार नहीं पाए। अब नए नेता कितने खरे उतरते हैं, यह जनता के बीच असमंजस की स्थिति बनीं हुई है। बता दें कि 2014 में लोकसभा आम चुनाव हुए। इसमें बीजेपी ने रामस्वरूप शर्मा और कांग्रेस ने प्रतिभा सिंह पर दांव खेला।

सांसद ने किया था जिक्र

प्रतिभा सिंह को हार मिली और रामस्वरूप शर्मा सांसद बने। सांसद रामस्वरूप शर्मा ने फिर जनता के बीच भूभू जोत टनल बनाने का बार-बार जिक्र किया, लेकिन पांच सालों तक भाषणों तक ही टनल सीमित रही। 2019 में लोकसभा आम चुनाव हुए। बीजेपी ने फिर पूर्व सांसद रामस्वरूप शर्मा पर दांव खेला।

हर बार रहा भूभू जोत टनल मुद्दा

वहीं, कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलकर आश्रय शर्मा को चुनावी रण में उतारा। फिर देश में भाजपा की सरकार बनी। इन चुनावों में भी भूभू जोत टनल मुद्दा रहा। 2021 में मंडी संसदीय सीट पर उपचुनाव हुए। कांग्रेस ने पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह और बीजेपी ने ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर को चुनावी रण में उतारा।

नए नेताओं पर कैसे करें विश्वास

इसमें कांग्रेस प्रत्याशी को 365650 मत पड़े। जबकि भाजपा प्रत्याशी को 356884 वोट पड़़े और भाजपा प्रत्याशी 8766 वोटों से हारे। इस दौरान भी भूभू जोत टनल मुद्दा चुनावी सुर्खियों में रहा। 2024 के आम लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बज गया, लेकिन भूभू जोत टनल का मुद्दा नेताओं के भाषणों से आगे उतर नहीं पाया। पुराने नेता बाहर हो गए हैं। अब नए नेताओं पर जनता कैसे विश्वास करेगी। यह चुनाव और मुद्दा रोचक देखने वाला होगा।

भाजपा को मिला चेहरा कांग्रेस की तलाश जारी

भाजपा ने तो 2024 के इस लोकसभा चुनाव में बिलकुल नए प्रत्याशी के नाम दांव खेला है। वहीं, अब कांग्रेस सांसद प्रतिभा सिंह का भी चुनाव लडऩे से इनकार है। अब शायद कांग्रेस भी नए ही चेहरे को यहां से लड़ा सकती है।

टनल बनने से यह मिलेगी सहूलियत

बता दें कि भूभू जोत टनल बनने से जिला मंडी के बरोट, भंगाल और कुल्लू जिला की लगघाटी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। भूभू जोत में टनल बनने से कुल्लू से जोगिंद्रनगर की दूरी 55 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह सपना कब साकार होगा, जनता दशकों इंतजार में बैठी है।

2012 से पहले उठा था मुद्दा

2012 से पहले भूभू जोत टनल की चर्चाएं शुरू हुई। तब मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद स्व. वीरभद्र सिंह थे। वहीं, 2013 में लोकसभा उपचुनाव हुए। कांग्रेस से प्रतिभा सिंह और बीजेपी से जयराम ठाकुर चुनावी रण में उतरे।

भूभू जोत टनल का मुद्दा खूब गूंजा। इस चुनाव में प्रतिभा सिंह ने जीत दर्ज की, लेकिन भूभू जोत टनल की बातें कार्यकाल में जनता के बीच होती रहीं।

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