विधायक प्राथमिकता बैठकों के पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले सत्र में ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के विधायकों के साथ बैठक में कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत राज्यों को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान को लेकर उठाया गया कदम पहाड़ी राज्यों के लिए घातक है।
यह अनुदान वर्ष 1952 से 15वें वित्त आयोग तक राज्यों की वित्तीय स्थिरता के लिए निरंतर मिलता रहा है, जिसे 16वें वित्त आयोग ने पहली बार बंद किया है, जो हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य के प्रति अन्याय है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर देश के पर्यावरण संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ हिमाचल से बहने वाली नदियों के माध्यम से पानी भी उपलब्ध करवाता है तथा केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद करना प्रदेश के हितों के साथ कुठाराघात है।
उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 37199 करोड़ रुपए के राजस्व घाटा अनुदान की सिफारिश की थी। इसके अलावा कोरोना काल के दौरान पिछली भाजपा सरकार को वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपए की सहायता मिली थी।
अनुदान बंद कर देने से राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुक्सान होगा। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार को अब कुशल वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए कड़े फैसले लेने पड़ेंगे।
केंद्र सरकार के आगामी बजट में मध्यम वर्ग और किसानों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि एवं बागबानी है, परंतु केंद्रीय बजट में बागबानों के लिए न तो किसी सबसिडी का प्रावधान है और न ही किसी बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र है।
उन्होंने कहा कि भानुपल्ली-बिलासपुर एवं चण्डीगढ़-बद्दी रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए भी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है।
यह बजट कोऑपरेटिव फैडेरलिज्म की भावना के विरुद्ध है तथा हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे पहाड़ी राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन्हें कर्ज बोझ तले दबाने के प्रयास का एक दस्तावेज है।
उन्होंने कंेद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करने व प्रदेश को विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने इस अवसर पर आशा व्यक्त की कि विधायकों द्वारा दिए गए बहुमूल्य सुझावों से प्रदेश में विकास की गति को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने बैठक में मुख्यमंत्री का स्वागत किया। बैठक में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विभागों के प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष तथा संबंधित उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नाबार्ड से 714 करोड़ की योजनाएं मंजूर करवाईं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड से 713.87 करोड़ रुपए की 73 योजनाएं स्वीकृत करवाई जा चुकी हैं।
इन स्वीकृत योजनाओं में 512.31 करोड़ रुपए की 55 विधायक प्राथमिकता योजनाएं लोक निर्माण विभाग से संबंधित हैं और 201.56 करोड़ रुपए की 18 विधायक प्राथमिकता योजनाएं जल शक्ति विभाग की हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि बजट का पूर्ण उपयोग किया जाए और नाबार्ड कार्यालय में प्रतिपूर्ति दावे 15 मार्च, 2026 से पहले जमा करें।
इसके अतिरिक्त मार्च, 2026 तक नाबार्ड से और अधिक विधायक प्राथमिकताओं को स्वीकृत करवाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है।































