लांगणा के शूल नामक स्थान में स्थित है पंचमुखी महादेव का मंदिर

जोगिन्दरनगर : जोगिन्दरनगर उपमंडल के तहत 33 किलोमीटर की दूरी पर लांगणा गाँव में स्थित है पंचमुखी महादेव मंदिर. यहाँ भगवान शिव पंचमुखी महादेव के रूप में विराजमान हैं.यह मंदिर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के पास ही स्थित है. इस मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति लगभग 150 वर्ष पूर्व ब्यास नदी में आई.

लांगणा के पास रुकी मूर्ति

जब मूर्ति ब्यास नदी में बहती हुई आई तो लांगणा गाँव के पास आकर शीशम के पेड़ में फंस गई. इस स्थानीय पंडित ने जब यह घटना देखी तो वह मूर्ति को उठाकर घर ले जाने लगा.मूर्ति शीशम के पेड़ की जड़ों में इस प्रकार फंसी थी कि उसे शीशम के तने से अलग कर पाना मुश्किल था. उसके बाद पंडित पंचमुखी महादेव की मूर्ति को शीशम के तने सहित ही दरिया से किनारे से उठा कर अपने घर ले जाने लगा. मूर्ति के साथ पेड़ का तना भारी होने के कारण कुछ ही दूरी तय करने के बाद पंडित तक गए तो उन्होंनें मूर्ति को पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया.

नहीं हिली मूर्ति

विश्राम करने हेतु रुके पंडित जब दोबारा से मूर्ति को उठाने लगे तो मूर्ति को नहीं उठा पाए. उसके बाद मूर्ति को पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित कर दिया. लोग वहीँ पर मूर्ति की पूजा अर्चना करने लगे.मूर्ति में लगे तने से मूर्ति का निचला हिस्सा जलहरी बनाया गया व शेष बची तने की लकड़ी से ढोल बनाया गया जिसे सीरा समुदाय के लोगों के पास रखा गया है. कहते हैं कि कोई भी घटना होने पर रात के समय में इसमें आवाज आती है.

शूल नामक स्थान पर बना मंदिर

30-35 वर्ष पूर्व महादेव एक स्थानीय व्यक्ति के सपने में आए और उसे मंदिर बनाकर स्थान देने के लिए कहा तो स्थानीय लोगों के सहयोग से शूल नामक स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया एवं मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया. हैरानी की बात यह है कि मूर्ति को स्थापना हेतु जब पीपल के पेड़ के नीचे से उठाने लगे तो कम से कम 20-25 लोगों के सहयोग ही उठ सकी जबकि इस मूर्ति को अकेला पंडित ही उठा लाये थे.

शिवरात्रि और सावन में लगता है भक्तों का मेला

यहाँ शिवरात्रि और सावन में भक्तों का मेला लगता है और विशेष पूजा अर्चना होती है.वर्तमान में महात्मा बसंत गिरी जी मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं और मंदिर कमेटी आने वाले श्रद्धालुओं की हर सुविधा का ध्यान रखती है और मेले का भी आयोजन किया जाता है.लंगर की व्यवस्था कमेटी द्वारा की जाती है.श्रद्धालु बेल पत्रों,गंगाजल तथा पंचामृत से पंचमुखी महादेव की पूजा करते हैं. शिवरात्रि में उपवास रखकर पंचमुखी महादेव की पूजा करते हैं तथा मनचाहा वरदान पाते हैं और सभी कष्टों का नाश होता है.

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