पवित्र स्नान के साथ ही मंगलवार से शुरू हो रहा तीन दिवसीय मच्छयाल मेला

जोगिन्दरनगर : जोगिन्दरनगर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मच्छयाल में मंगलवार से तीन दिवसीय मेले का शुभारम्भ हो रहा है. यह मेला शाही स्नान के साथ शुरू होता है. इस मच्छयाल मेले में उपमंडलाधिकारी मुख्यतिथि के रूप में शिरकत कर रहे हैं।

पवित्र स्नान के साथ ही मंगलवार से शुरू हो रहा तीन दिवसीय मच्छयाल मेला

मछिन्द्र देवता की होती है पूजा

लोग सुबह यहाँ स्नान करके पूजा अर्चना करके मछिन्द्र देवता का आशीर्वाद भी लेते हैं. भारतीय देसी महीना बैसाख के शुरू होते ही मच्छयाल मेला शुरू होता है. इस मेले को बैसाख का मेला के नाम से भी जाना जाता है.

सांस्कृतिक कार्यक्रम

मच्छयाल मेले में कई महिला मंडलों व स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कई खेलों वॉलीबॉल आदि का भी आयोजन होता है।

देसी महीना बैसाख

भारतीय देसी महीने बैसाख में यहाँ मेला लगता है. मेला तीन दिन तक चलता है और आसपास के गाँव के लोग यहाँ मेले का आनन्द उठाने आते हैं तथा ख़ुशी से झूम उठते हैं.

कुश्ती मुख्य आकर्षण

मेले में कई खेलों के अलावा कुश्ती का भी आयोजन किया जाता है जोकि मेले का मुख्य आकर्षण होती है। कुश्ती का
फाइनल मुकाबला मेले के अंतिम दिन होता है. कुश्ती में जिले के, स्थानीय व बाहरी राज्यों के पहलवान भी अपना दमखम दिखाने यहाँ आते हैं और आकर्षक इनाम जीत कर जाते हैं.

ऊहल और रणा खड्ड का संगम है

बस्सी पन बिजली परियोजना में इस्तेमाल उहल नदी का पानी, रणा खड्ड, गुगली खड्ड का पानी मच्छयाल के पास मिलता है और एक छोटी नदी लूणी का रूप ले लेता है.

अब ऊहल तृतीय चरण परियोजना के लिए ऊहल नदी का पानी बस्सी और रणा खड्ड का पानी भरोलू नामक स्थान से लिया गया है जिससे अब इस धार्मिक स्थल के लिए बहुत ही कम मात्रा में पानी छोड़ा गया है।

मछलियों के भगवान का एक बहुत ही सुन्दर मन्दिर झील की ऊपर की तरफ है.

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