नागचला में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

जोगिंद्रनगर : जोगिंद्रनगर के धार्मिक स्थल में यह आस्था का प्रवाह ही था, जो हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब नागचला में उमड़ पड़ा। जोगिंद्रनगर से करीब चार किलोमीटर दूर धौलाधार की तराई पर हराबाग के पास स्थित तीर्थ स्थल नागचला 20 भादों के पवित्र न्हौण पर एक बार फिर जोगिंद्रनगर जनपद ही नहीं, बल्कि कांगड़ा, मंडी, सरकाघाट, संधोल, लडभड़ोल, मंडी और बरोट सहित अनेक क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान के साथ-साथ धार्मिक निष्ठा का केंद्र बना।

श्रद्धालुओं का जनसैलाब पावन न्हौण के लिए उमड़ा तो एनएच 154 हराबाग से लेकर स्नान कुंडों तक एक किलोमीटर के फासले में तिल धरने की भी जगह नहीं बची थी। पवित्र स्नान से चर्म रोगों से मुक्ति की कामना से भी अनेक लोगों ने पावन जल में डुबकी लगाई। सैकड़ों निःसंतान महिलाओं द्वारा यहां पवित्र जल कुंड में तैरते अखरोट, सेब और अन्य फलों को अपनी ममता के दामन में समेटने के प्रयास किए गए। यहां जल में तैरते फल जिन महिलाओं के आंचल में दौडे़ चले आएं, मान्यता है कि उनकी सूनी गोद कभी खाली नहीं रही है।

पुलिस के केवल दो जवान और एक होमगार्ड की महिला कर्मी पूरी व्यवस्था का संचालन कर रहे थे। नागदेवता के पुजारी केशव राम, चमन शर्मा, गगन कुमार, काली दास, रणजीत सिंह, रामपाल तथा बीर सिंह ने बताया कि यहां नागदेवता का प्रादुर्भाव किसी चमत्कार से भी कम नहीं है। उन्होंने बताया कि सूखा क्षेत्र होने के कारण अतीत में इस स्थान पर हराबाग के ग्रामीणों द्वारा पानी के लिए पूजा-अर्चना की जाती थी। एक दिन एक विराट नागदेवता इस स्थान पर प्रकट हुए, जिनकी पूंछ बिल में थी, जबकि सिर करीब डेढ़ सौ मीटर दूर सींबल के पेड़ पर था, जब लोगों की निगाहें इस चामत्कारिक घटना पर पड़ीं तो नागदेवता पीछे की तरफ सरकते हुए इसी बिल के अंदर चले गए और बिल से तत्काल पानी की धारा बह निकली।

Courtesy: Divya Himachal

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