आप सभी को भगवान शिव के पर्व महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। इस बार महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। पर इस बार ग्रहों के विशेष संयोग बन रहे हैं. इस बार चतुर्ग्रही योग के साथ महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शुक्रादित्य योग और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है.

शिवलिंग पर चढ़ाएं बेलपत्र
मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं. जीवन में सभी प्रकार के कष्ट, बीमारी, पीड़ा, भय भी दूर होते हैं.
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5:06 बजे होगी और 16 फरवरी को शाम 5:35 बजे तक रहेगी. इस बार महाशिवरात्रि के दिन सूर्य, शुक्र, राहु और बुध ग्रह की युति का विशेष चतुर्ग्रही योग बन रहा है.
विधान से करें पूजा
महाशिवरात्रि की पूजा चारों प्रहर में करना उत्तम होता है, लेकिन निशिथ काल का मुहूर्त सबसे प्रभावशाली है.
मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे. इस दिन महादेव और देवी पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए. नमः शिवाय” के पांच अक्षर पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और शिव के पांच रूपों का प्रतीक हैं.
इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन की शुद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है. चार प्रहर पूजा के प्रत्येक प्रहर में दूध, दही, मधु, चीनी से भगवान शिव का अलग-अलग अभिषेक किया जाना चाहिए.
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और शिव परिवार का रात्रि पर्यंत अभिषेक करना चाहिए. रात्रि के समय जागरण करके व्रत रखना चाहिए.
चार प्रहर की पूजा में प्रत्येक प्रसाद में खीर, मालपुआ, गुलाब जामुन, रेवड़ी, ऋतु फल चढ़ाकर शिव परिवार को प्रसन्न करना चाहिए.
इस दिन भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाता है. वैसे तो महाशिवरात्रि की पूजा कभी भक्तिभाव से की जाए तो श्रेष्ठ है लेकिन जो कई लोग रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते है.
महाशिवरात्रि पर पूजा के शुभ मुहूर्त :-
प्रथम प्रहर की पूजा शाम 6.14 से रात 9:27 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा रात्रि 9.28 से 12.41 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा रात 12:42 से 3:54 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा रात 3.55 बजे से अगले दिन सुबह 7.07 बजे तक
नवग्रह दोष होते हैं दूर
भगवान शिव सब देवताओं के देवता हैं इसलिए उन्हें देवाधिदेव कहा जाता है. किसी भी ग्रह की पीड़ा से युक्त व्यक्ति यदि भगवान शिव की शरण में चला जाता है तो उसे उस ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है. कालसर्प दोष और अकस्मात मृत्यु के भय से पीड़ित व्यक्ति यदि भगवान शिव की आराधना करता है तो उसका दोष और भय दूर होता है इसीलिए भगवान शिव को महाकाल कहा जाता है.
ऐसे करें पूजा
भगवान शिव की पूजा आराधना अभिषेक करने के लिए शिव परिवार की पूजन की विधि है. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए और उसके बाद भगवान शिव का पूजन और अभिषेक करना चाहिए. मां पार्वती के साथ ही भगवान शिव की पूजा होती है.
इसके साथ ही भगवान शिव के दूसरे पुत्र भगवान कार्तिकेय और भगवान शिव की सवारी नंदी और गले में धारण शेषनाग की भी पूजा की जाती है. भगवान शिव का दूध घी शक्कर चीनी जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है.
शिव का करें रुद्री पाठ
इस दौरान भगवान शिव के रुद्री के पाठ करने चाहिए जिससे जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है. पूजा करने के बाद उन्हें बेलपत्र अर्पित करने चाहिए. बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. भगवान शिव को हर तरह का प्रसाद चढ़ाया जाता है लेकिन प्रसाद में विजया (भांग) बहुत जरूरी है क्योंकि भगवान शिव को विजया बहुत प्रिय है.
शिव पूजा करने का तरीका
शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करना चाहिए
धतूरा, मदार के फूल, बेलपत्र, चंदन और अक्षत अर्पित करना चाहिए
मन ही मन में 108 बार ओम् नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
निर्जल व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।































