फोरलेन प्रोजेक्ट को वन विभाग की मंजूरी, एनएच परियोजना के लिए पहली बाधा पार

हिमाचल में नेशनल हाई-वे के फोरलेन प्रोजेक्ट ने पहली बाधा पार कर ली है। एफसीए क्लीयरेंस में फंसे आठ प्रोजेक्ट को वन विभाग से मंजूरी मिल गई है और फाइल को केंद्र सरकार के वन और पर्यावरण विभाग को सौंपा गया है। वन और पर्यावरण विभाग को अब इन प्रोजेक्ट्स पर फैसला लेना है।

केंद्र सरकार की सहमति मिलने के बाद ही एनएचएआई प्रदेश में नेशनल हाईवे के काम शुरू कर सकता है। फिलहाल, केंद्रीय वन और पर्यावरण विभाग की इन प्रोजेक्ट्स की सहमति को लेकर अहम बैठक 19 जनवरी को होने वाली है। इस बैठक में एनएचएआई और वन विभाग की मंजूरी के बाद दोनों विभाग के पास पहुंचे नेशनल हाई-वे को फोरलेन में बदलने के प्रारूप पर चर्चा होगी।

केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद दोबारा नेशनल हाई-वे के प्रोजेक्ट को सर्वाेच्च न्यायालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानी केंद्र सरकार का इन प्रोजेक्ट पर फैसला ही अंतिम माना जाएगा और इसके बाद फोरलेन का काम हिमाचल में शुरू हो सकता है।

फिलहाल जो आठ प्रोजेक्ट इस समय फंसे हुए हैं, उनमें कालका-शिमला नेशनल हाई-वे पर तीसरे चरण में कैंथलीघाट से ढली तक, शिमला-मटौर और पठानकोट-मंडी फोरलेन के बीच के प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनकी फाइल वन विभाग के पास पहुंची थी। वन विभाग ने बिना समय गंवाए इन्हें पारित कर दिया है।

हालांकि केंद्र सरकार के अधीन वन और पर्यावरण विभाग ने अभी तक एनएचएआई को एनओसी नहीं दी है और इस वजह से यह काम अटके हुए हैं। उधर, एनएचएआई के परियोजना निदेशक राम आसरा का कहना है कि वन और पर्यावरण विभाग की मंजूरी के बगैर प्रोजेक्ट शुरू नहीं किए जा सकते हैं।

वहीं, अभी भी आठ प्रोजेक्ट की फाइलें मंजूरी के लिए फंसी हैं। इनको लेकर जल्द ही एनएचएआई प्रबंधन मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सकता है।

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने साफ किया था कि फोरलेन परियोजना पर जनवरी में मुख्यमंत्री से मुलाकात होगी। हालांकि अभी तक इस मुलाकात को लेकर समय तय नहीं हुआ है।

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