सिडडू के बाद अब मक्की और कोदरे की रोटी के दीवाने हुए लोग

कुल्लू : अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्व के लिए ढालपुर मैदान में सजी दुकानों में स्थानीय व्यंजन सिडडू, मक्की और कोदरे की रोटी और सरसों का साग परोसा जा रहा है तथा स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटक भी बड़े ही चाव के साथ इन व्यंजनों का भरपूर आनंद ले रहे हैं. ढालपुर मैदान में दीवाली तक दुकानें सजी रहेंगी. मक्की की रोटी जहाँ हृदय को स्वस्थ रखने के साथ- साथ कोलेस्ट्रोल को कम करती है वहीँ कोदरे की रोटी भी पौष्टिकता के अलावा शूगर सहित कई बीमारियों के लिए रामबाण का काम करती है.

कुल्लू का सिडडू है प्रसिद्ध

कुल्लू का ख़ास व्यंजन सिडू अब मशहूर हो गया है. इसके अलावा मक्की और कोदरे की रोटी और साग के लोग दीवाने हो गए हैं.दशहरा मैदान में सागर ढाबे में महिलाएं सुबह से लेकर शाम तक कोदरे और मक्की की रोटी बनाने में व्यस्त हैं. लोगों को इन व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लाइन में खड़े होकर इंतज़ार करना पड़ रहा है.

व्यंजनों को लोग कर रहे पैक

सागर ढाबे में व्यंजनों का आनंद लेने के बाद लोग कोदरे की रोटी और साग को पैक करके घर लेकर जा रहे हैं. इसमें ख़ास बात यह है कि केवल 4 महिलाएं ही व्यंजनों को बनाने में व्यस्त हैं तथा डिमांड के अनुसार व्यंजन तैयार ही नहीं रहे हैं. इसके अलावा मोमो, चोमिन और कचौरी के स्टाल भी यहाँ पर चल रहे हैं.

रजनी ने उतारा था सिडू डिश को बाज़ार में

आज कुल्लू की प्रसिद्ध डिश सिडू को रजनी ने पहली बार 2001 में बाज़ार में उतारा था जो आज पूरी तरह से प्रसिद्ध हो गई है. अब सागर ढाबा ने मक्की की रोटी,कोदरे की रोटी और साग को मार्किट में उतारा है जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं.

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