यहाँ गिरे थे माँ सती के नैण : माँ नैना देवी

श्री नैना देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है. यह मंदिर एक सुन्दर पहाड़ी में बना है. बिलासपुर से यह मंदिर 60 तथा आनंद पुर साहिब {पंजाब} से 20 किलोमीटर की दूरी पर है. श्री नैना देवी का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है.

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जब माँ सती को आया गुस्सा

किवदन्ती के अनुसार देवी सती को भगवान शिव के प्रति अगाध प्रेम था. देवी सती ने भगवान शिव से विवाह कर लिया था जिस कारण देवी सती के पिता राजा प्रजापति दक्ष नाराज थे. दक्ष ने एक बार विराट यज्ञ का आयोजन किया लेकिन उन्होंने अपने दामाद और पुत्री को यज्ञ में निमंत्रण नहीं भेजा. फिर भी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई. लेकिन दक्ष ने पुत्री के आने पर उपेक्षा का भाव प्रकट किया और शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कही. सती के लिए अपने पति के विषय में अपमानजनक बातें सुनना हृदय विदारक और घोर अपमानजनक था. यह सब वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और इस अपमान की कुंठावश उन्होंने वहीं यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए.

यज्ञ कुंड में कूदी माँ सती

सती को दर्द इस बात का भी था कि वह अपने पति के मना करने के बावजूद इस यज्ञ में चली आई थी और अपने दस शक्तिशाली (दस महाविद्या) रूप बताकर-डराकर पति शिव को इस बात के लिए विवश कर दिया था कि उन्हें सती को वहां जाने की आज्ञा देना पड़ी. पति के प्रति खुद के द्वारा किए गया ऐसा व्यवहार और पिता द्वारा पति का किया गया अपमान सती बर्दाश्त नहीं कर पाई और यज्ञ कुंड में कूद गई.

यहाँ गिरे थे माँ सती के नैन

यह खबर सुनते ही शिव ने वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया. इसके बाद दुखी होकर सती के शरीर को अपने सिर पर धारण कर शिव ने तांडव नृत्य किया. पृथ्वी समेत तीनों लोकों को व्याकुल देख कर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र द्वारा सती के शरीर के टुकड़े करने शुरू कर दिए. इस तरह सती के शरीर का जो हिस्सा और धारण किए आभूषण जहां-जहां गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आ गए. देवी भागवत में 108 शक्तिपीठों का जिक्र है, तो देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का जिक्र मिलता है. देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों की चर्चा की गई है. वर्तमान में भी 51 शक्तिपीठ ही पाए जाते हैं.

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नवरातों में लगते हैं मेले

सभी 51 स्थानों में जहाँ सती के शरीर के टुकड़े गिरे इन स्थानों को शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है. ऐसा विश्वास है कि इस स्थान में माँ सती के नैन गिरे जिसे हिंदी भाषा में “नैना” कहा जाता है यानि आँखें. श्री नैना देवी मंदिर के करीब देवी के नाम की एक गुफा भी है. यहाँ भारतीय देसी महीनों चैत्र और अश्विन नवरात्रों के समय यहाँ मेले लगते हैं.

एक गडरिये ने बनाया था माँ का मंदिर

कहा जाता है कि आरम्भ में श्री नैना देवी का मंदिर एक गुज्ज़र गडरिये ने बनाया था. श्री नैना देवी मंदिर की पहाड़ियों से गोविन्द सागर झील का नज़ारा देखा जा सकता है. इस झील का निर्माण भाखड़ा नंगल बांध निर्माण के तहत किया गया था.

श्री नैना मंदिर राष्ट्रीय उच्च मार्ग के साथ जुड़ा हुआ है. इस मंदिर में सड़क मार्ग के द्वारा पहुँचा जा सकता है जिसमें कई मोड़ हैं.उसके बाद पैदल रास्ते को तय करने के बाद ऊपर मंदिर में पहुँचा जा सकता है.यहाँ केबल कार की सुविधा भी है जोकि यात्रियों को पहाड़ी के आरम्भ से छोटी तक पहुँचाती है.

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