
उन्होंने एलेक्जेंडर एड्वर्ड्स जोंस की लिखी पुस्तक ‘कॉमन बर्ड्स ऑफ शिमला’ को दोबारा प्रकाशित और संपादित किया है। वह ‘हिमाचल बर्ड्स’ नाम से कॉफी टेबल बुक के भी लेखक हैं। गोयल के अनुसार हिमाचल प्रदेश में घरों के नए आर्किटेक्चर ने गौरैया को बेघर कर दिया है।
बेशक, हिमाचल प्रदेश में घरों के आसपास गौरैया के लिए पहले की तरह अनुकूल वातावरण कम होता जा रहा है। बावजूद इसके जहां गौरैया को खाने के लिए कीड़े-मकौड़े, अनाज आदि मिलता है, वहां यह खूब दिखाई देती है।
हिमाचल में नजर आती है दो तरह की गौरैया
हिमाचल प्रदेश में दो तरह की गौरैया नजर आती है। एक सामान्य गौरैया है। सामान्य गौरैया में जो पुरुष होता है, उसके गले में एक काला पैच होता है। जो दूसरी गौरैया है, उसे रसेट स्पैरो कहते हैं। इसका धूसर रंग होता है। यानी, लोहे के जंग जैसा होता है।
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