करुणामूलक भर्ती नीति में होगा बदलाव

हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक भर्ती नीति में फिर बदलाव होने जा रहा है। मुख्य सचिव के स्तर पर इस बारे में हुई दो बैठकों के बाद अब वित्त विभाग संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। इसके बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। अंतिम फैसला राज्य सरकार चुनाव आचार संहिता हटने के बाद ही लेगी। वित्त विभाग में जारी समीक्षा में हालांकि वन टाइम छूट देकर सभी आवेदन स्वीकार करने का फैसला होने की उम्मीद नहीं है।

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इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के आर्डर और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 हैं, लेकिन आय सीमा से लेकर विभागीय कोटा में बदलाव किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी किसी आवेदक का अधिकार नहीं है, लेकिन गरीबी की स्थिति के आधार पर राज्य सरकार इस बारे में नीति बना सकती हैं और इसे तीन साल के बाद समीक्षा के तहत बदल भी सकती हैं। इसी दायरे में यह संशोधन होगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा विधानसभा में अनुकंपा भर्तियों पर आश्वासन दिए गए हैं।

ये भी संशोधित नीति में शामिल किए जा रहे हैं। विभागों में कैडर वाइज पांच फीसदी कोटा की सीलिंग ऐसी नियुक्तियों के लिए है। इसके बदलना है, तो भी फैसला लेने के लिए कैबिनेट ही अधिकृत है। इससे पहले सरकार ने करुणामूलक भर्ती नीति में 2019 में संशोधन किया था। इसमें परिवार की सालाना आय सीमा दो साल की गई थी और आवेदन की पात्रता को भी दिवंगत कर्मचारी की रिटायरमेंट ऐज तक बढ़ा दिया था।

इसके बाद 2020 में भी इसमें हल्के संशोधन हुए। लेकिन जो करुणामूलक आश्रित छूट मांग रहे हैं, वह है व्यक्तिगत आय सीमा और वन टाइम छूट से नियुक्ति देने के। इस पर सरकार क्या फैसला लेती है? यह चुनाव आचार संहिता के बाद ही पता चलेगा। (एचडीएम)

करुणामूलक भर्ती नीति में वे आवेदक आते हैं, जिनके परिवार से किसी सदस्य की सरकारी सेवा में मौत होती है। दिवंगत कर्मचारियों के बच्चे या पत्नी क्लास थ्री या क्लास फोर कैटेगरी में नौकरी के लिए सशर्त पात्र हैं। हालांकि अब आवेदक नए वेतन आयोग के मिलने से परेशान हैं। इससे फैमिली पेंशन बढ़ जाएगी और आय सीमा के कारण आवेदक बाहर भी हो सकते हैं, इसलिए वे चाहते हैं कि यह मामला हल हो जाए।

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