उच्च न्यायालय ने दिए कम्प्यूटर शिक्षकों को नियमित करने के आदेश

लगभग 2 दशकों से आऊटसोर्स के आधार पर सेवाएं देने वाले कम्प्यूटर शिक्षकों को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पेरैंट टीचर्ज एसोसिएशन के अंतर्गत लगाए गए शिक्षकों, ग्रामीण विद्या उपासकों व प्राइमरी असिस्टैंट टीचर्ज की तर्ज पर याचिका दाखिल करने की तारीख से नियमित करने के आदेश जारी किए हैं।

न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने मनोज कुमार शर्मा व अन्य 21 शिक्षकों द्वारा वर्ष 2016 में दायर याचिका को स्वीकार करते हुए निर्णय में स्पष्ट किया कि ये लोग लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए प्रयास कर रहे हैं।

मामले के विशिष्ट तथ्यों में राज्य सरकार की निष्क्रियता का संज्ञान रिट अधिकारिता के प्रयोग में लिया जा सकता है। प्रतिवादियों द्वारा याचिकाओं की श्रेणी और पीएटी जीवीयू और पीटीए योजनाओं में प्रारंभिक नियुक्तियों के बाद नियमित किए गए शिक्षकों की श्रेणी के बीच किया जा रहा भेद भी निराधार है और स्पष्ट रूप से भेदभाव को दर्शाता है।

उपरोक्त श्रेणियों की सेवाओं को नियमित करने का मुख्य उद्देश्य उनकी सेवाओं की प्रकृति के साथ जुड़े स्थायित्व से जुड़ा था।

याचिकाकर्त्ताओं द्वारा दी गई लंबी सेवाओं और 1,000 से अधिक पदों के सृजन से उन पदों की स्थायी प्रकृति स्पष्ट रूप से स्थापित होती है, जिन पर याचिकाकर्त्ता 2 दशकों से अधिक समय से कार्यरत हैं।

केवल इसलिए कि उनकी नियुक्ति आऊटसोर्स एजैंसियों के माध्यम से हुई है, जो समय-समय पर बदलती रही हैं, राज्य के दायित्वों को पूरा करने में उनके द्वारा किए गए कार्य के सार को कम नहीं आंका जा सकता।

कोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया और प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे 12 सप्ताह के भीतर सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी करके याचिकाकर्त्ताओं की सेवाओं को कम से कम याचिका दायर करने की तिथि से पीएटी जीवीयू और पीटीए श्रेणियों के बराबर नियमित करें।

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