शिमला का पहला रोप-वे दस साल में बन कर तैयार!

शिमला|| हनुमान जयंती से ठीक एक दिन पहले यानि सोमवार 10 अप्रैल 2017 को पहाड़ों की रानी शिमला के पहले रोप-वे ने काम करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार को जाखू रोप-वे को जनता को समर्पित किया। रोप-वे के जरिये लोग रिज मैदान से मात्र छह मिनट में प्रसिद्ध जाखू मंदिर पहुंच सकेंगे।

शिमला आने वाले पर्यटकों के लिए यह रोप-वे एक मुख्य आकर्षण होगा क्योकि रोप-वे ट्राली में बैठकर वे हिल्स क्वीन शिमला की खूबसूरती को ऊंचाई से निहार सकेंगे।  रोप वे में पारदर्शी केबिन लगाए गए हैं। रोप-वे पर दो कैबिन जाखू मंदिर से रिज़ की ओर और दो रिज़ से जाखू मंदिर की ओर एक साथ चलेंगे। एक केबिन में एक साथ छह लोग बैठ सकते हैं।  इस तरह रोप-वे के द्वारा एक साथ कुल 24 लोग यात्रा कर सकेंगे।

जाखू रोप-वे

जाखू रोप-वे से सफ़र करने का दोनों तरफ का किराया प्रति-व्यक्ति 550 रुपये जबकि एक तरफ का किराया 300 रुपए रखा गया है। स्थानीय लोगों के लिए रियायती मासिक पास बनाने का ऐलान किया गया है। इस रोप-वे के शुरू होने से शिमला में टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

जैक्सन इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से बनाए गए इस रोप-वे के जरिये लोग महज छह मिनट में जोधा निवास से जाखू पहुंच सकेंगे। सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर बने रोपवे में कंपनी पर्यटन विभाग के माध्यम से संचालन के पहले साल सरकार को 57 लाख रुपये का लाभांश तथा इसके बाद हर साल एकत्रित राशि का 15 प्रतिशत देगी।

जाखू रोप-वे राजधानी शिमला का पहला रोप-वे है। 2007 में इसका शिलान्यास किया गया था और दस साल के लंबे अंतराल के बाद रोप-वे बन कर तैयार हुआ है। स्विट्जरलैंड की तकनीक पर बनाए गए इस रोप-वे के निर्माण पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

जाखू रोप-वे

शिमला में इस तरह का एक और रोप-वे बनाया जाना प्रस्तावित है। इस पर काम शुरू हो चुका है, जो कि टूटीकंडी बाइपास की क्रॉसिंग के पास तैयार हो रहा है। ये पूरे शहर के ऊपर से होता हुआ जोधा निवास के पास पहुंचेगा।

रोप-वे के निर्माण की योजना कई सालों से लटकी पड़ी थी इसलिए इसके पूरा होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

 

शिमलाहोम

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