अप्रैल में बनेगी भुभू जोत टनल की डीपीआर

रक्षा मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद समारिक महत्त्व वाली प्रस्तावित भुभू जोत टनल व सड़क की डीपीआर बनाने का काम अप्रैल माह में आरंभ होगा। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने डीपीआर को लेकर टेंडर प्रक्रिया कर ली है।

मार्च के अंत तक पूरी होगी औपचारिकताएँ

अब एनएचएआई चयनित एजेंसी के साथ अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। माना जा रहा है कि मार्च के अंत तक यह कार्य निपटा लिया जाएगा और उसके बाद डीपीआर बनाने का काम आरंभ हो जाएगा।

जानकारी के अनुसार नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जनवरी माह के दौरान भुभू जोत टनल की डीपीआर के लिए एजेंसी चयन हेतु टेंडर प्रक्रिया आरंभ की थी। फरवरी माह में यह प्रक्रिया पूरी हो गई है।

घटासनी-शिल्हा बधानी-भुभू जोत-कुल्लू सड़क

इसके बाद एनएचएआई तकनीकी बिड समेत अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटा हुआ है। अहम है कि घटासनी-शिल्हा बधानी-भुभू जोत-कुल्लू सड़क का राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में निर्माण किया जाना है। इसके तहत सडक़ को अपग्रेड कर टू-लेन के लिए डीपीआर तैयार की जानी है।

इस प्रस्तावित नेशनल हाइ-वे के तहत एक टनल का भी निर्माण होना है। इसके लिए नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया की ओर से डीपीआर बनाने हेतु टेंडर प्रक्रिया की है।

बता दें कि टनल और सड़क निर्माण को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मामला केंद्र के समक्ष उठाते रहे हैं। वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह इसी मुद्दे को लेकर पूर्व में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

सामरिक महत्त्व वाली सड़क

साथ ही समय-समय पर दिल्ली दौरा कर केंद्र के समक्ष इस सामरिक महत्त्व वाली सड़क का मामला रखते रहे है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से भी इस प्रोजेक्ट को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की और टनल व सडक़ निर्माण के लिए डीपीआर बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया गया।

सेना की राह आसान

घटासनी-शिल्ह बधानी-भुभू जोत-कुल्लू सड़क सेना के लिहाज से बेहद महत्त्वूपर्ण है। इसके निर्माण से सेना की बॉर्डर तक पहुंचने की राह भी आसान होगी। साथ ही पठानकोट से सेना की कारगिल और लद्दाख तक पहुंचने का सफर कम होगा और समय की भी बचत होगी।

तीन जिलों की दूरी होगी कम

टनल व सडक़ निर्माण होने के बाद कुल्लु से कांगड़ा, जोगिन्दरनगर और धर्मशाला की दूरी भी काफी कम हो जाएगी।

यह सडक़ कुल्लु मुख्यालय से लगघाटी होते हुए मंडी के घटासनी में पठानकोट रोड़ से जुड़ेगी। इससे क्षेत्रीय संपर्क भी कम बेहतर होगा और लोगों का यात्रा समय भी घटेगा।