अद्भुत ! कंडक्टर जोगिंद्र ने आज तक नहीं ली कोई छुट्टी

16 साल 8 माह। एक लंबा वक्त। इस बीच बहुत कुछ बदला। कई पारिवारिक चुनौतियां सामने आईं। सगे-संबंधी दुनिया छोड़ गए, लेकिन जोगिंद्र सिंह का अटल इरादा नहीं बदला। जुनून है एक रिकॉर्ड बनाने का। नौकरी के इस सफर को 4 जून 2022 को 17 साल पूरे हो जाएंगे।

हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) के नाहन डिपो में बतौर परिचालक तैनात जिला सिरमौर के संगड़ाह उपमंडल के रजाणा गांव के रहने वाल जोगिंद्र सिंह (46) ने आज तक की नौकरी में एक भी अवकाश नहीं लिया। साल 2016 में चाचा-चाची का निधन हुआ।

25 अगस्त 2020 में पिता सुंदर सिंह का देहांत हुआ। चार माह भी नहीं गुजरे कि 24 दिसंबर को माता मथुरा देवी भी नहीं रहीं, लेकिन जोगिंद्र किसी के भी अंतिम संस्कार में भी हिस्सा नहीं ले पाए। जोगिंद्र सिंह का इरादा बिलकुल अटल है। कर्म को पूजा मानने वाले जोगिंद्र साप्ताहिक अवकाश पर भी काम करते हैं।

कोरोना काल के बीच जब लॉकडाउन लगा तो भी सेवाएं जारी रखीं। सैकड़ों अर्जित अवकाश लैप्स हो गए। उन्हें 2015 और 2020 में दो बार प्रतिपूरक अवकाश में 50 फीसदी कटौती के शपथ पत्र निगम प्रबंधन को देने पड़े। शपथपत्र में उन्होंने साफ किया कि इसके लिए वह कभी दावा पेश नहीं करेंगे।

वह वर्तमान में नाहन-घाटों रूट पर सेवाएं दे रहे हैं। जोगिंद्र का कहना है कि उनकी पत्नी जमुना देवी और बच्चों के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है। उनका बेटा आदित्य ठाकुर नौवीं कक्षा और बड़ी बेटी तमन्ना ठाकुर द्वितीय वर्ष की छात्रा है। परिवार किराये के मकान में नाहन में रह रहा है।

सिर्फ दो घंटे दिन में वह परिवार के साथ होते हैं। इसके बाद वह ड्यूटी पर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मेरा नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल होता है तो खुशी होगी। वह 2011 और 2015 में दीवाली पर ड्यूटी के दौरान दो ही बार पैतृक गांव गए थे।

निजी बस में नौकरी के दौरान भी उन्होंने कभी अवकाश नहीं लिया। वह आज तक कभी बीमार नहीं हुए। उनके लिए सुखद यह भी है कि वे तीन सगे व तीन चचेरे भाई हैं। सभी संयुक्त परिवार में रह रहे हैं। इस वजह से भी वह अपनी नौकरी पर पूरा ध्यान दे पाए हैं। रिश्ते-नाते, ब्याह-शादी, सुख-दुख की हर घड़ी में उनकी पत्नी और परिवार के ही लोग बरतते आए हैं।

हर स्टोपेज पर जोगेंद्र कहते हैं कि सवारियां अपना मोबाइल पैसा चेक कर लें। गाड़ी में न छोड़ें। उनकी ईमानदारी और मधुर स्वभाव की सवारियां ही नहीं निगम प्रबंधन भी कायल है। वह जिस भी रूट पर सेवाएं देते हैं, निगम की कमाई बढ़ना शुरू हो जाती है। इतना बड़ा त्याग करने वाले जोगिंद्र सिंह को न कभी सरकार और न हिमाचल पथ परिवहन निगम ने कोई पुरस्कार दिया।

विभागीय तौर पर उन्हें रूट की आय बढ़ाने पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। सरकार व प्रशासन तक भी उन्हें सम्मानित करने की बात पहुंचाई जाएगी।
– सुखराम ठाकुर, निरीक्षक एवं अड्डा प्रभारी, नाहन डिपो 

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