देवता और डायनों ने जीते 3-3- युद्ध, एक रहा बराबरी पर

तुंगल क्षेत्र की शक्ति पीठ माता बगलामुखी मंदिर सेहली में गणेश चतुर्थी की संध्या पर 65वीं वार्षिक जाग का आयोजन सूक्ष्म रूप से किया गया जिसमें केवल माता के कारदारों ने भाग लिया.माता बगलामुखी के गुर एवं पुजारी अमरजीत शर्मा ने माता के गर्भगृह में पूजा अर्चना करने के बाद माँ के आदेशानुसार पूजा पद्धति को पूर्ण किया गया.

आषाढ़ महीने में देवता युद्ध के लिए तैयारियां आरम्भ कर देते हैं और निर्णायक युद्ध भाद्रपद महीने में होते हैं. इस बार देवता और डायनों के बीच कुल 7 युद्ध हुए जिसमें 3 स्थानों पर देवता और 3 स्थानों पर डायनें विजयी रहीं और एक युद्ध बराबरी पर रहा.10 महाविद्याओं में एक बगलामुखी माता ने अपने भक्तों की सुरक्षा के लिए अपना आशीर्वाद दिया.

मान्यता के अनुसार अगर डायनें युद्ध जीत जाती हैं तो फसल के लिए फायदा होता है लेकिन अगर देवता जीतें तो जनमानस को लाभ होता है.

किवदंती के अनुसार पद्धर उपमंडल में स्थित घोघर धार में यह युद्ध होता है तथा युद्ध से पहले डायनें और देवता लोगों पशुओं को लागत पर लगाते हैं. हमारा उद्देश्य किसी प्रकार के अन्धविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है लेकिन किवदंती को भी झुठलाया नहीं जा सकता.

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