दो कंपनियों में उत्पादन बंद होनेे से प्रदेश में खाद संकट

शिमला : प्रदेश में किसानों को खाद मुहैया करवा रही दो कंपनियां बंद हो गई हैं। इन कंपनियों के बंद होने से किसानों तक खाद की सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है। यह दोनों कंपनियां प्रदेश को 12-32-16 खाद मुहैया करवा रही थी। सदन में पंचायती कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इफको और जीएसएफसी कंपनी ने उत्पादन बंद किया है।

इस वजह से प्रदेश में सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि 12-32-16 की जगह एनपीके 15-15-15 किसानों को मुहैया करवाई जा रही है। ताकि किसी तरह की कोई कमी न रहे। इस संबंध में शिलाई के विधायक हर्षबर्धन चौहान ने सवाल उठाया था।

इसके जवाब में वीरेंद्र कंवर ने कहा कि यह खाद जरूरत के हिसाब से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद के दाम तय किए गए हैं। 12-32-16 का दाम 1470 रुपए प्रति बैग निर्धारित है। जबकि 15-15-15 खाद 1500 रुपए प्रति बैग दी जा रही है।

इसके साथ ही यूरिया-46 266.50 रुपये, एमओपी 60 फीसदी का रेट 1700 रुपये, एसएसपी 16 फीसदी 557 रुपये, जीएफएससी कैल्श्यिम नाइट्रेट प्लेन 1300 रुपये, कैल्श्यिम ब्रोन 1350, कैल्श्यिम लाइट्रेट प्लेन 1595 रुपए निर्धारित किया गया है। अब तक एक लाख दस हजार 863 मीट्रिक टन खाद प्रदेश के किसानों को मुहैया करवाई जा चुकी है।

शिमला में 192 नौतोड़ के मामले

शिमला जिला में 192 नौतोड़ के मामले स्वीकृत हुए हैं। इसका आज तक इंतकाल या पट्टा जारी नहीं हुआ है। यह खुलासा जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने किया है। जुब्बल-कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर के सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि तीन बार इस संबंध में उपायुक्तों को इस बारे में निर्देश जारी किए गए हैं।

जलरक्षकों का मानदेय नीतिगत मामला

सरकार जलरक्षकों को 3600 रुपए मानदेय प्रदान कर रही है और इसे बढ़ाने का फैसला सरकार का नीतिगत मामला है। यह बात जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कही है। वे सदन में धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया के सवाल का जवाब दे रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर जलरक्षकों के वेतन को लेकर निर्णय लेती है।

अब तैयार होगा 20 मीट्रिक टन सेब कंसेंट्रेट

प्रदेश में अब सेब कंसंट्रेट उद्योग की क्षमता 20 मीट्रिक टन होगी। सरकार विश्व बैंक की मदद से परवाणू में लगे कंसेंट्रेट उद्योग की क्षमता को बढ़ाने जा रही है। इसके साथ ही पराला में भी सेब कंसंटे्रट का नया प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। इससे सेब उत्पादकों को बड़ी राहत मिलेगी। सेब मंडी के बाहर उत्पादकों को इंतजार नहीं करना होगा। पराला मंडी में नए प्लांट को लेकर टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।

यह बात जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को सदन में कही। उन्होंने कहा कि परवाणू में लगा उद्योग करीब 43 साल पुराना है। इस उद्योग को जब शुरू किया गया था, तो इसकी क्षमता 10 मीट्रिक टन रखी गई थी। उद्योग में काम सिर्फ सीजन के दौरान ही होता है। अब इस उद्योग की क्षमता दोगुना करने का प्रयास सरकार कर रही है और विश्व बैंक से इसके लिए मदद ली जाएगी।

पराला मंडी में भी नया प्लांट जल्द ही बनाया जाएगा। वे सदन में विधायक रोहित ठाकुर के सवाल का जवाब दे रहे थे। रोहित ठाकुर ने परवाणू सेब रस संयंत्र से तीन वर्षों में बेचे गए कंसेंट्रेट के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि तीन वर्षों में 28 हजार 817 मीट्रिक टन सेब का इस्तेमाल किया गया और इससे दो हजार 326 मीट्रिक टन कंसेंट्रेट का उत्पादन किया गया है।

मैदानी इलाकों में भी बर्बाद हो रही फसल

इंदौरा की विधायक रीता धीमान ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में आम, लीची, संतरे की फसल के बर्बाद होने पर उचित मुआवजा नहीं मिल पाता है। प्रदेश में फसलों के नुकसान की बात चलती है तो सिर्फ सेब का जिक्र सुनने को मिलता है, जबकि सेब के अलावा भी मैदानी इलाकों में बागवान हैं। उन्हें न तो सरकार से उचित सहायता मिलती है, न ही फसल बेचने के लिए बाजार उपलब्ध है। इसके जवाब में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में शिवा प्रोजेक्ट के तहत फलों की प्रजातियों को विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई भी इसी प्रोजेक्ट से होगी।

लावारिस भवनों पर होगा सरकारी कब्जा

प्रदेश सरकार अब प्रोजेक्ट के लिए निर्मित भवनों का इस्तेमाल करेगी। यदि भवन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है तो इसका सामाजिक इस्तेमाल किया जा सकता है। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने यह बात शुक्रवार को सदन श्री नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर के सवाल के जवाब में कही। रामलाल ठाकुर ने कहा कि लाखों रुपए खर्च कर भवन का निर्माण किया गया है और प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद भवन को लावारिस छोड़ दिया गया। अब भवन का कोई भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। प्रदेश भर में ऐसे कई भवन हैं जो इस हाल में हैं।

सीडीपीओ के पद नहीं भरेगी सरकार

महिला एवं बाल विकास विभाग में सीडीपीओ के खाली पद नहीं भरे जाएंगे। इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से आदेश जारी हुए हैं। यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सीडीपीओ के 31 पद थे।

केंद्र सरकार की ओर से एक ही पद सहायक सीडीपीओ का भरने की इजाजत दी गई है। इस संबंध में कांगड़ा के विधायक पवन काजल ने सवाल उठाया था। उन्होंने प्रदेश में खाली पदों को लेकर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में सरकार की तरफ से न में जवाब देने के बाद उन्होंने आपत्ति जताई और उस पर मंत्री सरवीण चौधरी ने जवाब सदन में रखा।

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