शान्ति और आध्यत्मिकता का केंद्र है भूतेश्वर महादेव मंदिर

जोगिन्दरनगर उपमंडल के तहत ऐहजू के पास गांव रड़ा के करीब स्थित है भूतेश्वर महादेव मंदिर. इस मंदिर की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. स्थानीय गाँववासी प्रीतम बरवाल ने बताया कि आज से लगभग 50 वर्ष पहले एक घुमन्तु महात्मा जी मोहनघाट्टी में पधारे थे.

महात्मा ने यहाँ किया था रात्रि विश्राम

मोहनघाटी में स्थित एक चाय की दुकान पर चाय पीने के बाद कुछ देर आराम किया. रात्रि विश्राम के बारे में जब उन्होंनें दुकानदार से पूछा दुकानदार ने उनको पास ही में स्थित श्मशान घाट के बारे में बताया कि वही एकमात्र विकल्प है रात्रि गुजारने के लिए. तो वे संत रात को वहीं ठहर गए. अब जब स्थानीय लोगों को उनके बारे में पता चला तो उन्होंने उनके खाने पीने की कुछ व्यवस्था की .

जब यहाँ रम गया साधू का मन

धीरे धीरे महात्मा जी का मन वहां रम गया. लेकिन श्मशान घाट में रहने की व्यवस्था ठीक नहीं थी. लेकिन स्वर्गीय लम्बरदार श्री खजान सिंह बरवाल जी ने कुटिया का पुनर्निर्माण स्थानीय लोगों की मदद से करवा दिया . महात्मा जी अति उच्च कोटि के चरित्रवान व्यक्ति महाज्ञानी थे. इसलिए गांव रडा-भंखेड के लोग हर समय उनकी पूरी देख रेख व सेवा में लगे रहते थे. इसी तरह कई वर्ष बीत गए . महात्मा जी कभी कहीं घूमने चले जाते लेकिन स्थानीय लोगों की याद उनको फिर वही वापस खींच कर ले आती.

गाँव वासियों का प्रेम खींच लाता था

इसी दौरान उन्होंने सुन्दर नगर में भी गद्दी की स्थापना की . लेकिन फिर भी गांव रड़ा -भंखेड के लोगों का समर्पण व सेवा भाव उनको बार बार वापस यहां खींच लाता था . इस तरह कई वर्ष बीत गए और महात्मा जी वहीं रम गए . फिर शुरू हुआ श्मशान घाट में भूतेश्वर महादेव जी के मंदिर का निर्माण कार्य . स्थानीय लोग चन्दा देते गए तथा वहां पर धीरे धीरे स्वर्ग का निर्माण होता गया . धीरे धीरे महात्मा जी के शिष्य बढ़ते गए .

बरबस ही खींचे चले आते हैं लोग

आज मोहनघाट्टी के पास भव्य मंदिर बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच लाता है. जहां दिन के समय में भी लोग जाने से डरते थे अब वहां रात को भी लोग बेखौफ आते जाते रहते हैं . शिवरात्रि के दिन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन तथा सर्वाधिक गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ मेलों जैसा माहौल होता है । गुरू पूर्णिमा के एक सप्ताह पहले से वहां पर श्री मद्भागवत कथा का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया जाता है तथा गुरु पूर्णिमा के दिन वहां भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है .

महात्मा श्री बलदेवानंद जी संभाले हैं यहाँ की जिम्मेवारी

लेकिन बड़े दुःख के साथ बताना पड़ रहा है कि अब वे महान आत्मा गुरु जी हमारे बीच नहीं रहे हैं । पांच वर्ष पहले से ब्रह्म लीन हो गए हैं । अब उनके परम शिष्य महात्मा श्री श्री बलदेबानन्द जी महाराज पूरी निष्ठा के साथ पुज्य गुरु जी श्री श्री वेदानन्द जी सरस्वती जी की परम्परा को निभा रहे हैं ।

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