बनगुफा बनौण : प्रकृति, शान्ति और अध्यात्म का संगम

श्री अजय कुमार

जोगिन्दरनगर : हिमाचल प्रदेश मण्डी जिला के जोगिन्दरनगर तहसील से सात कि.मी. की दूरी पर बल्ह पंचायत के मुहाल बनौण में जंगल के आँचल मेँ स्थित बनौण बनगुफा का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है. स्वर्गीय महात्मा श्री सदानंद गिरी भी ज्योतिष, गणित और तंत्र-मंत्र के बहुत बड़े ज्ञाता थे.

दिनांक 9 दिसम्बर को महात्मा जी ब्रह्मलीन हो गये. अब बाबा कुटिया का कार्यभार हरिद्वार से आए महात्मा श्री शिव शंकर गिरी ने सम्भाल लिया है. आज भी यह स्थान पवित्र, शांति से परिपूर्ण, स्वाध्याय और आध्यात्म के खोजी जिज्ञासु जनों के लिए सर्वथा उत्तम है.

गुफा में किया बाबाओं ने तप

स्थानीय निवासियों के अनुसार इस गुफा मेँ जूना अखाड़ा गुजरात के गिरी सम्प्रदाय के सात -सात नागा बाबा गुफा के अन्दर कई वर्षों तक तप मेँ लीन देखे गये थे. उसके बाद इस गुफा में ईलायची नाम से प्रसिद्ध बाबा काफी समय तक रहे.

बाद में संध्यागिरी ने संभाली गद्दी

श्री स्वरूपानन्द जी के बाद संतसमाज व स्थानीय लोगोँ की सहमति से गिरी सम्प्रदाय के श्री सँध्यागिरी ने इस गद्दी को संभाला. कुछ समय बाद वह दूसरी जगह चले गये और उनके बाद मौजूदा महात्मा श्री सदानंद गिरी इस स्थान पर विराजे.

सदानंद गिरी ने पूरा किया ब्रह्मचारी का स्वप्न

स्वर्गीय श्री स्वरूपानंद जी ने इन्हेँ स्वप्न मेँ अधूरे 24 वर्षों के शेष समय के मौन का संकल्प पूर्ण करने की प्रेरणा दी. उसके बाद इन्होँने मौन रख कर ब्रह्मचारी जी के स्वप्न को साकार किया.

वर्तमान में भक्तों के योगदान से इस स्थान मेँ 5 पक्के व 2 कच्चे कमरों का निर्माण, शिव पार्वती मँदिर, माँ दुर्गा का मँदिर, हनुमान मंदिर व शिव मँदिर व शनिदेव मंदिर का निर्माण किया जा चुका है व शनिदेव की प्रतिमा भी स्थापित हो चुकी है .

9 दिसम्बर को श्री सदानंद गिरी के देहावसान के बाद कुटिया के प्रांगण में सदानंद गिरी की समाधि बनाई गई है.

दूर -दूर से आते हैं श्रद्धालु

वर्षों से दूर दूर से लोग यहाँ पर विराजमान संतों/महात्माओं के पास अपनी समस्याओं के समाधान खोजने आते रहे हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है. तंत्र-मंत्र-यन्त्र और जादू टोने से लेकर सामान्य घरेलू समस्याएँ विराजमान संत के समक्ष रखते लोग सामान्य तौर पर यहाँ देखे जा सकते हैं.

तंत्र -मन्त्र और ज्योतिष शास्त्र में हैं निपुण

स्थानीय लोगो के अनुसार स्व.महात्मा श्री स्वरूपानंद जी तंत्र-मंत्र और ज्योतिष-शास्त्र के बहुत बड़े विद्वान थे. वर्तमान महात्मा श्री सदानंद गिरी भी ज्योतिष, गणित और तंत्र-मंत्र के बहुत बड़े ज्ञाता थे. वैसे भी यह स्थान पवित्र, शांति से परिपूर्ण, स्वाध्याय और आध्यात्म के खोजी जिज्ञासु जनों के लिए सर्वथा उत्तम है.

वर्ष में दो बार लगता है भंडारा

वैसे तो यह स्थान सभी के लिए वर्ष भर खुला है, इस स्थान मेँ वर्ष में दो बार आम जनता के लिए भंडारा लगता है. आज भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भंडारा लगता है. परन्तु स्वामी सदानंद गिरी जी ने महाराज पूर्व महात्मा श्री स्वरूपानंद जी की पुण्य तिथि पर भी भंडारे का आयोजन करवाना शुरू किया है जो अब हर साल लगता है.

पूर्व मंत्री ने जोड़ा था मुख्य सड़क से

एक दो साल पहले तक लोगों को इस स्थान तक 3 किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ता था. वर्ष 2007 में जोगिन्दरनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक गुलाब सिँह इस तपोस्थली में पहली बार आए तथा चुनाव जीतने के बाद इस स्थान को सड़क से जोड़ने का संकल्प कर गये.

2010 में इस स्थान को मुख्य सड़क से जोड़ दिया गया तथा सरकारी सहायता से ऊपर की मंजिल मेँ बहुत बड़ा लँगरहाल बनवाया गया है.

सड़क हो रही पक्की

बनौण स्कूल की तरफ से आधी से ज्यादा सड़क पक्की हो चुकी है जो जल्द ही बाबा कुटिया तक भी पक्की होगी.

इस तपोस्थली में है लोगों की आस्था

इस गुफा के नाम माल कागजात मेँ दो बीघा से ऊपर भूमि दर्ज है. चारोँ तरफ बान और चीड़ के घने पेड़ हैँ. यहाँ कुदरती पानी के स्त्रोत भी हैँ. लोगोँ में इस तपोस्थली के प्रति बहुत आस्था है. लोग दूर- दूर से गाड़ियोँ मेँ बाबा जी के दर्शन करने आते हैँ व आर्शीवाद पाकर धन्य हो जाते हैँ.

वर्तमान में रह रहे श्री शिव शंकर गिरी ने भी शाश्त्री की पढ़ाई की है व ज्योतिष का भी ज्ञान रखते हैं. महात्मा जी का कहना है कि वे कुटिया में आने वाले समय में गौ सदन बनवाना चाहते हैं तथा स्थानीय बच्चों को संस्कृत का ज्ञान देना चाहते हैं.

वर्तमान में श्री शिव शंकर गिरी जी कथा प्रवचन हेतु भ्रमण पर हैं उनके स्थान पर श्री महेश गिरी जी कुटिया की देख रेख कर रहे हैं तथा लोगों के कष्टों का निवारण कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।

“जय बाबा जी की”

श्री अजय कुमार द्वारा प्रेषित

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