नवंबर से मार्च तक मछली के शिकार पर प्रतिबन्ध

हिमाचल प्रदेश के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी खुले ट्राउट क्षेत्रों में हर तरह की मछली का शिकार 1 नवंबर, 2012 से 28 फ़रवरी 2013 तक तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है. हिमाचल प्रदेश की वैब साईट के अनुसार, नियम का उल्लंघन करने पर हिमाचल प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1976 के प्रावधानों के अनुसार दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी. उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में इस समयावधि अर्थात नवम्बर से मार्च को ट्राउट मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है. 

हिमाचल प्रदेश के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी खुले क्षेत्रों के अतिरिक्त निम्नलिखित ट्राउट मछली क्षेत्रों में ऊपर दी गयी समय-अवधि के दौरान मछली पकड़ना सर्वथा अवैध है.

प्रतिबंधित ट्राउट क्षेत्र:

  • शिमला जिला में पब्बर नदी पर गाँव महला से गाँव हाटकोटी तक.
  • व्यास नदी पर अपने स्रोत से कुल्लू जिले में सरवरी धाराओं के साथ संगम और उसकी सहायक नदियों और धाराओं में.
  • कुल्लू जिले में पार्वती और उनकी सहायक नदियों और धाराओं में.
  • कुल्लू जिले में सैंज और इसकी सहायक नदियों और धाराओं में.
  • कुल्लू और मंडी जिला में ब्यास नदी के साथ संगम के ऊपर तिरथन और उसकी सहायक नदियों और धाराओं में.
  • मंडी और कांगड़ा जिला में नदी उहल और उसकी सहायक नदियों और धाराओं में. बरोट में फीडर चैनलों और संतुलन जलाशय में.
  • चम्बा जिले में चकोली पुल के ऊपर पूरे भन्दाल नाले और उसकी सहायक धाराओं में.
  • किन्नौर जिले में सतलुज नदी प्रणाली में बासपा भाबा और चिस्सो धाराओं में.
  • कांगड़ा जिले में मैन्झा पुल के ऊपर न्युगल धारा और इसकी सहायक धाराओं तथा बनेर खड्ड में टिक्कर डोली में झूला पुल से पहले के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में.
  • कुल्लू जिले में सतलुज नदी प्रणाली में कुरपन धारा और उसकी सहायक धाराओं में.

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष 1 जून से 31 जुलाई तक सामान्य पानी क्षेत्रों तथा 1 नवंबर से 28 फ़रवरी तक ट्राउट पानी क्षेत्रों में मछली के शिकार पर प्रतिबन्ध रहता है.

हिमाचल प्रदेश

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